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समय पूरा, ओडीएफ का मिशन अधूरा

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ज्ञानपुर। गांधी जी की 150वीं जयंती के दो दिन पूर्व 30 सितंबर को प्रशासन से जिले को ओडीएफ यानी खुले में शौच से मुक्त घोषित कर तो दिया लेकिन बहुत से गांवों में शौचालयों का निर्माण कार्य अभी भी पूरा नहीं हो पाया है। प्रशासन की उदासीनता और जागरूकता की कमी के कारण स्वच्छता मिशन अधूरा है। करीब 170 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी खुले में शौच जाने के लिए ग्रामीण मजबूर हैं। 2004 में यूपीए की सरकार में संपूर्ण स्वच्छता अभियान का आगाज हुआ लेकिन शौचालय निर्माण की रकम 500 से एक हजार तक होने से यह धरातल पर आगे नहीं बढ़ सकी। 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता मिशन को एक अभियान की तरह लिया। 2016 तक शौचालयों का निर्माण कच्छप गति से चला लेकिन 2017 में सूबे में भाजपा की सरकार बनी तो निर्माण में तेजी आई। शासन से लेकर प्रशासन ने युद्ध स्तर पर काम भी किया। नतीजन बढ़ी संख्या में शौचालय का निर्माण हुआ। पंचायत राज विभाग का दावा है कि जिले के 561 ग्रामसभाओं के 1091 राजस्व गांव को 30 सितंबर को ओडीएफ किया गया जबकि धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रहा है। दो लाख 40 हजार शौचालयों का निर्माण पूरा किया गया। जिसमें 2014 के बाद करीब 1.40 लाख शौचालय बनाए गए। अमर उजाला की टीम ने ज्ञानपुर ब्लॉक के ओडीएफ गांव सरई राजपुुतानी, सरई मिश्रानी, औराई के कुरौना, डीघ के कूड़ी खुर्द, बरजी, डेरवां को देखा तो बड़ी संख्या में शौचालय अपूर्ण मिले। एक-दो नहीं गांवों में 20 से लेकर 50 शौचालय आधे अधूरे बने हैं। ठाकुर बस्ती में जितेंद्र सिंह और राजा सिंह केे आवंटित शौचालयों की अब तक छत नहीं पड़ी है। इसी तरह दलित बस्ती में तूफानी गौतम, डंगरा देवी समेत अन्य लाभार्थियों के शौचालय भी अपूर्ण हैं। औराई के कुरौना और बासदेवपुर गांव में भी कमोबेश वैसे ही हालत मिली। लाभार्थी धरमदेव, राजेश दूबे, सत्यदेव उपाध्याय, गिरजा देवी के शौचालय आठ माह पूर्व बनकर तैयार हैं, लेकिन छत अब तक नहीं पड़ सकी है।
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