फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अखंडाश्रम में बही काव्य रस की धार

विज्ञापन
विज्ञापन
हिंदी साहित्य परिषद की ओर से शुक्रवार को भिदिउरा स्थित अखंडाश्रम में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें साहित्यकारों ने एक से बढ़कर एक कविताएं प्रस्तुत की। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. राजकुमार पाठक की अध्यक्षता में गोष्ठी संपन्न हुई। डॉ. राजकुमार पाठक ने नकल पर नकेल कसे जाने पर परीक्षार्थियों की ओर से उत्तरपुस्तिका पर लिखे जाने वाले शब्दों पर व्यंग्य किया। कहा एक परीक्षार्थी ने कापी में अपनी प्रेमिका को प्रेम पत्र लिखा - जपते-जपते उसकी नाम की माला। लिखा सुनीता जी धीरे-धीरे प्यार को बढ़ाना है, गणित तो आती नहीं फेल होकर साल भर आंखों को लड़ाना है। इसी तरह सुरेश पांडेय मंजुल ने दर्द से सामना हो गया, मन मेरा आईना हो गया। छांव ममता का जब भी मिला, मां का चेहरा प्रकट हो गया, तेरी नाजुक अदा देखकर आइना भी फिदा हो गया। इस दौरान विनीत कुमार श्रीवास्तव, कन्हैयालाल दूबे, चंद्रभूषण पाठक ने भी कविताएं प्रस्तुत की। इस मौके पर कमलाशंकर, लालचंद्र, हरिभूषण, रजनीश पाठक, कृष्ण मुरारी, संजय पाठक, लालमणि पाठक आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें