ज्ञानपुर। जिले में इस साल खरीफ सीजन की 50 हेक्टेयर में प्याज की खेती करने का लक्ष्य तय किया गया है। खेती के लिए किसानों का चयन प्रथम आवक प्रथम पावक की तर्ज पर किया जाएगा। यानी जो पहले विभाग में पहुंचेगा उसे पहले बीज दिया जाएगा।
जिला उद्यान अधिकारी सुनील तिवारी ने बताया कि इस साल 50 हेक्टेयर में प्याज की खेती करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रथम आवक प्रथम पावक के तर्ज पर किसानों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। खरीफ प्याज फसल की खेती के लिए किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। अब तक करीब 70 से 75 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। सत्यापन के बाद किसानों को बीज उपलब्ध कराया जाएगा। सबसे अधिक किसान औराई और डीघ ब्लाक के हैं। बीते साल किसानों का चयन करने में विभाग को कॉफी मशक्कत करनी पड़ी थी। लेकिन इस साल ऐसा नहीं है। किसान स्वयं विभाग में आकर सारी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही विभाग की ओर से ग्रामीण अंचलों में जाकर किसानों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है। कई किसान परंपरागत खेती धान और गेहूं को छोड़कर नकदी खेती की ओर रुचि दिखा रहे हैं। उद्यान अधिकारी की मानें तो नई तकनीकी से खेती करके किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
बारिश में प्याज की खेती से बचते हैं किसान
बारिश के मौसम में प्याज की खेती करने से किसान बचते हैं। उनका मानना होता है कि इस सीजन में प्याज की खेती का मतलब नुकसान ज्यादा है, लेकिन ऐसा है नहीं। उद्यान अधिकारी ने बताया कि गर्मी के मौसम में जो प्याज लगाई जाती है वह दूसरी प्रजाति की होती है। उसे कम पानी चाहिए होता है, लेकिन खरीफ सीजन की प्याज में पानी थोड़ा ज्यादा चाहिए होता है। यानी यदि किसान खेती करना चाहें तो नुकसान नहीं है। खरीफ सीजन में प्याज की खेती से महंगाई पर भी नियंत्रण लगेगा।