ज्ञानपुर। अभोली विकास खंड के गोपीपुर गांव में मनरेगा से फर्जी भुगतान करने में एडीओ और सेक्रेटरी की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। जालसाजी के मुकदमे में गवाही न देने पर दोनों के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है। जल्द ही दोनों की गिरफ्तारी हो सकती है। अभोली विकास खंड के हरिकरनपुर गांव निवासी नन्हेलाल ने जुलाई 2017 में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी कि गोपीपुर गांव के दर्जन भर से अधिक लोगों ने रोजगार सेवक, सेक्रेटरी और एडीओ पंचायत के सहयोग से गोपीपुर और छनौरा गांव से मनरेगा मजदूरी का भुगतान करा दिया। शिकायतकर्ता की ओर से दी गई एमआईएस फीडिंग रिपोर्ट में सभी का दोनों गांव में जाब कार्ड पाया गया। मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रशासन की ओर से लाभार्थियों के साथ ही ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी और एडीओ पंचायत के खिलाफ जालसाजी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस की ओर से मामले की विवेचना की गई। उसके बाद विवेचना न्यायालय में रिपोर्ट भेजी गई। न्यायालय से कई बार नोटिस जारी होने के बाद एडीओ और सेक्रेटरी गवाही देने के लिए नहीं पहुंचे। इसको संज्ञान में लेते हुए जेएम प्रथम पवन सिंह की अदालत ने एडीओ पंचायत नंद कुमार दूबे और ग्राम पंचायत अधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया। एनबीडब्ल्यू जारी होने के बाद एडीओ और सेक्रेटरी की मुश्किलें बढ़ गई है।