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एक दशक से लटका 40 करोड़ का मसौदा

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डायट परिसर में निर्माणधीन आडिटोरियम हाल। संवाद - फोटो : BHADOHI
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ज्ञानपुर। कालीन नगरी में स्वास्थ्य और शिक्षा की 40 करोड़ की परियोजनाएं एक दशक बाद भी पूर्ण नहीं हो सकी हैं। बजट की कमी और भ्रष्टाचार इन परियोजनाओं के पूर्ण होने में बाधक बनी है। जनप्रतिनिधियों का प्रयास भी रंग नहीं ला पा रहा है। इससे आम जन को मिलने वाली सुविधाओं के लिए अभी भी इंतजार करना पड़ेगा। 2009-10 में बसपा की सरकार में 14 करोड़ की लागत से सरपतहां में 100 शैय्या अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ। करीब एक दशक से अधिक समय गुजर गए। लागत 14 से बढ़कर 18 करोड़ पहुंच गई, लेकिन अब तक अस्पताल पूर्ण नहीं हो सका। यहां ओपीडी की शुरुआत भले ही हो चुकी है, लेकिन अब भी 30 फीसदी से अधिक भवन अपूर्ण हैं। अस्पताल निर्माण की एसआईटी जांच भी चल रही है। भदोही में छह-छह करोड़ की लागत से पॉलीटेक्निक कॉलेज और छात्रावास का निर्माण भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। अभोली में तीन करोड़ की सीएचसी भी आधी अधूरी छोड़कर कार्यदायी संस्था गायब हो चुकी है। चार से पांच साल में पूर्ण होने वाली परियोजनाएं एक दशक बाद भी पूर्ण नहीं हो सकीं। कार्यदायी संस्थाओं पर मुकदमा दर्ज हुआ, उसके अफसर जेल भी गए। एसआईटी जांच भी हो गई, लेकिन परियोजनाएं अब तक पूर्ण नहीं हो सकी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में सवा करोड़ से प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्र भवन का कार्य भी बजट के अभाव में तीन साल से ठप है। इसी तरह भदोही के मामदेवपुर में पांच-पांच करोड़ से बनने वाले अल्पसंख्यक जीआईसी और जीजीआईसी भी छह साल से बजट के अभाव में अधूरा पड़ा है। जो भवन बने हैं वह भी निगरानी के अभाव में खराब होने लगे हैं। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी संतोष कुमार ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, लोक निर्माण, जल निगम सहित अन्य विभागों की करीब 300 करोड़ की परियोजनाएं चल रही हैं। जिसमें 250 करोड़ की परियोजनाएं 60 से 95 फीसदी तक पूर्ण हो चुकी हैं। एसआईटी जांच और बजट न मिलने से 40 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं पूर्ण नहीं हो सकी हैं। हर साल उच्चाधिकारियों की ओर से उनके पूर्ण होने के लिए शासन को पत्र लिखा जाता है। स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़ी 40 करोड़ की परियोजनाएं पूर्ण हो तो आम जन को इसका लाभ मिले। भदोही के अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्र में निर्माणाधीन राजकीय इंटर कॉलेज और बालिका इंटर कॉलेज पूर्ण होने पर छात्र-छात्राओं को पढ़ने में सहूलियत मिलेगी। पॉलिटेक्निक कॉलेज पूर्ण हो तो युवा तकनीकी रूप से दक्ष होंगे।100 शैय्या का अस्पताल पूर्ण रूप से संचालित हो तो लोगों को वाराणसी और प्रयागराज न जाना पड़े।
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