ज्ञानपुर। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश सत्र पूर्ण हो गया है, लेकिन 350 सीटें खाली रह गई। सिर्फ बीएससी बायो के प्रति छात्र-छात्राओं में दिलचस्पी दिखी। बायो के लिए तय सीटों से 10 फीसदी बढ़ाना पड़ा। सभी सीटें भरने के लिए कॉलेज प्रशासन ने एक बार फिर 26 सितंबर तक प्रवेश के लिए तिथि बढ़ा दिया है।
काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्नातक, परास्नातक में सभी संकाय की पढ़ाई होती है। यहां सोनभद्र, मिर्जापुर, जौनपुर आदि जिले के छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिए आते हैं, लेकिन जैसे-जैैसे हर जिलों में कॉलेजों की संख्या बढ़ी तो यहां छात्रों की संख्या में कमी आई, हालांकि तब भी बेहतर पठन-पाठन के कारण यह महाविद्यालय जिले के विद्यार्थियों की पहली पसंद बना रहा।
पहले यहां 10 दिनों में कुल 1740 सीटें भर जाती थीं, लेकिन गुजरे दो साल में कॉलेज प्रशासन को स्नातक की सीटें भरना मुश्किल हो गया है। कॉलेज में स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश की प्रक्रिया 16 जुलाई से शुरू है। शुरू में 31 जुलाई तक प्रवेश चलना था, लेकिन काफी संख्या में सीटें खाली रहने से कॉलेज प्रशासन ने पहले 15 अगस्त, 20 सितंबर और 26 सितंबर तक बढ़ा दिया। तमाम कवायद के बाद भी सभी सीटें नहीं पूरी हो पा रही है।
स्नातक कला वर्ग की 840 में 635, बीएससी बॉयो में 360 में 395 सीट वृद्धि के बाद, मैथ में 300 में 132, कॉमर्स वर्ग में 240 सीटों में 211 एडमिशन हुए हैं। कुल मिलाकर 1740 में 1368 सीटें भर सकी। 20 फीसदी के करीब सीटें अब भी खाली हैं। प्राचार्य डॉ. रमेश चंद्र यादव ने कहा कि कॉलेज में सभी सीटें भरने के लिए डेढ़ महीने पहले समय बढ़ाया गया। अब तीन दिन और बढ़ाया गया है।
स्नातक में कुल सीट एवं प्रवेश की स्थिति
- बीए कला वर्ग में 840 में 635।
- बीएससी बायो में 360 में 395 33 प्रतिशत सीट वृद्धि के बाद।
-बीएससी मैथ में कुल सीट 300, प्रवेश 132
- बीकाम में सीट 240 और प्रवेश 211 है।
परास्नातक में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू
ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एमए, एमएससी और एमकाम प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गया है। छात्र-छात्राएं कॉलेज की वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। प्राचार्य डॉ. रमेश यादव ने बताया कि 10 से 12 दिनों बाद प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी।