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चुनावी बुखार का पारा चढ़ा, जीत-हार के दावे

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सीतामढ़ी। लोकसभा चुनाव की दुंदुभी बजते ही राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने लगी है। जिले के लोगों पर चुनावी बुखार का पारा चढ़ने लगा है। गांवों में गंवई नेताओं को भी राजनीतिक जुकाम सताने लगा है। चाहे महेंद्र शर्मा की चाय की दुकान हो या जटा पांडेय की चाट फुल्की की ठेलिया या सीतामढ़ी में त्रिलोकी नाथ की दुकान...हर जगह केवल चुनावी बयार। आम आदमी से लेकर छुटभैये नेताओं तक के बोलबचन सुनने को मिल रहे हैं। अपनी-अपनी पार्टी के जीत हार के दावे के साथ कोई सरकार के विकास कार्यों और राष्ट्र हित में मोदी को दोबारा कुर्सी पर बैठाना चाहता है तो कोई महागठबंधन की सरकार चाहता है। जबकि, कुछ ऐसे लोग भी दिखे, जो राहुल को पीएम बनाने की बात कह गए। चाय पान की दुकान से लेकर गलियों और चौराहों पर लोग चुनावी चर्चा में गला फाड़ फाड़ कर चुनावी विश्लेषण करते नहीं थक रहे हैं। टिकट को लेकर अभी किसी भी पार्टी ने अपने तरकश से उम्मीदवार रूपी तीर नहीं निकाला है, लेकिन चट्टी चौराहों के छुटभैये नेताओं की जुबान पर हर पार्टी के उम्मीदवारों के नाम की भविष्यवाणी तैर रही है। चाय की चुस्की लेते एक ग्रामीण ने कहा कि नेता जी ऐसे लगता है कि सभी पार्टियों के प्रत्याशियों के चयन का जिम्मा आप पर ही है। यह सुन नेताजी लाल पीले हो गए। बोले, इतने दिनों की नेतागिरी में सड़क पर खाक थोड़े ही छाने हैं। चुनाव को लेकर लोगों में कहीं किचकिच तो कहीं जीत-हार के आंकड़ों पर गर्मागर्म बहस चट्टी-चौराहों का नजारा बन गया है। कुछ नेता भदोही जनपद की सभी विधान सभाओं के जातिगत आंकड़ों में जोड़ घटाना लगा रहे हैं तो कुछ हंडिया और प्रतापपुर के वोटों की माथापच्ची में समय खपाते दिखे। बृहस्पतिवार को पर्यटन स्थली सीतामढ़ी में महाराष्ट्र से आए सैलानियों ने भी लोगों के साथ यूपी की राजनीति में दिलचस्पी दिखाई। यहां की चुनावी चर्चा में शामिल होते हुए सैलानियों ने कहा कि राष्ट्रहित में काम करने वाली पार्टी और ईमानदार प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करना चाहिए।
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