ज्ञानपुर/ऊंज। वाराणसी-इलाहाबाद हाईवे पर बेजुबानों की तस्करी का संगठित कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रतिदिन 50 से अधिक पशु लदे ट्रकों और कंटेनरों को कोडवर्ड के जरिये जिले की सीमा पार करा दिया जाता है। इसमें औसतन ढाई से तीन हजार मवेशी हर रोज स्लॉटर हाउस पहुंचा दिए जा रहे हैं। खास बात यह कि जाइलो और स्कार्पियो जैसे लक्जरी वाहनों में भी पशुओं को बेरहमी से ठूंसकर ढोया जाता है। चंदौली से लेकर उन्नाव तक एनएच-2 पशु तस्करों के लिए महत्वपूर्ण जोन बन गया है। बड़ी संख्या में भैंस एवं पड़वा आदि की उन्नाव तक और गाय, बैल की पश्चिम बंगाल की तरफ धड़ल्ले से तस्करी की जा रही है। सरकार की सख्ती के बाद भी प्रतिदिन चार दर्जन से अधिक वाहन पुलिस की मिलीभगत से जिले की सीमा पार करा दिए जाते हैं। लखनऊ तक काम कर रही पशु तस्करों की लॉबी ने इस कारोबार को संगठित अपराध का रूप दे दिया है। यही वजह है कि उन्नाव से लेकर चंदौली तक हाईवे पर पड़ने वाले हर जिले की पुलिस के कुछ सिपाही और दारोगा और होमगार्ड उनके सिंडिकेट का हिस्सा बन गए हैं। यहां पड़ोसी जनपद इलाहाबाद की सीमा पर भीटी में एक स्थान पर ठीहा बनाकर तस्कर आगे रास्ता खाली होने का लोकेशन लेते हैं। इसमें पुलिस के कुछ सिपाही और होमगार्ड उनकी मदद करते हैं। रास्ता साफ होने की जानकारी मिलते ही तस्कर हाईवे पर फर्राटा भरते हुए निकल जाते हैं। दूसरी ओर महाराजगंज के पास एक होटल से लोकेशन लेकर तस्करों के वाहन जिले में आगे बढ़ते हैं। लोकेशन देने के लिए तस्करों का सिंडिकेट कोडवर्ड का इस्तेमाल करता है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इलाहाबाद और वाराणसी सीमा के आसपास ठीहा बनाकर रुके तस्कर गाड़ी पास कराने के लिए अक्सर भोर में चार बजे से छह बजे के बीच का समय चुनते हैं, जब पुलिस के अधिकारी रात्रि गश्त के बाद आराम की मुद्रा में होते हैं। हर कदम पर पैसे की खनक से प्रभावित इस कारोबार में पुलिस वालों को भी महीना दिया जाता है। पुलिस आए दिन पशु लदे ट्रकों को पकड़ती रहती है, लेकिन कारोबार की तुलना में उस पर रोक का आंकड़ा बेहद कम है।