सुरियावां। बिहियापुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कथा का रसपान कराते हुए पं. जटाशंकर दुबे व्यास ने कहा कि भगवान दानवों के साथ-साथ देवताओं और अपने भक्तों का भी अहंकार नष्ट कर देते हैं। भक्तिरस में डूबने पर अहंकार स्वत: दूर हो जाता है। कथा वाचक ने बुधवार को अहंकार को लेकर कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि मानव, दानव और देवता जिसे भी अहंकार हुआ प्रभु ने उसके अहंकार को नष्ट किया। देवर्षि नारद, देवराज इंद्र समेत कई देवता अहंकार के वशीभूत हुए तो प्रभु ने उनका भ्रम तोड़कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने पूतना उद्धार से लेकर इंद्र यज्ञ निवारण तक की कथा का मार्मिक वर्णन किया। कहा कि पूतना जैसी बाल घातनी को भी भगवान ने गोलोक धाम पहुंचा दिया। प्रभु की बाल लीला को देखकर ब्रहमा जी को भी भगवान के प्रति शंका हुई। उन्होंने बछड़ों और ग्वालों का अपहरण कर लिया। उनके मान मर्दन के लिए प्रभु ने एक साल तक बछड़े और ग्वालों का रूप धारण कर लिया। गोपियों के चीर हरण पर भगवान ने यह संदेश दिया कि नग्न होकर कभी भी जल में स्नान नहीं करना चाहिए, ऐसा करने से जल के देवता वरुण का अपमान होता है। प्रभु ने गोवर्धन के माध्यम से इंद्र का मान मर्दन किया। मौके पर कमलेश उपाध्याय, मोतीलाल पाठक, कमला प्रसाद पांडेय, उर्मिला मिश्रा, बालाजी, घनश्याम दास गुप्ता, छेदी गुप्ता, पारसनाथ पांडेय, विनय उपाध्याय, बृजेश तिवारी आदि रहे।