ज्ञानपुर। केशव प्रसाद राल्ही स्नातकोत्तर महाविद्यालय औराई में बीएड के विद्यार्थियों और प्राध्यापकों लिए आयोजित चार दिवसीय विशेष योग प्रशिक्षण शिविर में बुधवार को योग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए योग और हर्बल विशेषज्ञ योगाचार्य विजय श्रीवास्तव ने कहा कि स्वस्थ रहने का सशक्त माध्यम नियमित योग करना है। कहा कि स्वस्थ्य कहलाने का अधिकारी वही है, जिसके वाद, पित्त और कफ सम हो। जठराग्नि सम, शरीर को धारण करने वाली सप्त धातुएं रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, तथा वीर्य (तेज) उचित अनुपात में हों। मल मूत्र की क्रिया सम्यक प्रकार से होती हो। पांचों कोश अन्नयन, प्राणमय, मनोमय, ज्ञानमय और आनंदमय कोश स्वस्थ हो। मन और उसका स्वामी आत्मा भी प्रसन्न हो। शरीर में विद्यमान पंचवायु प्राण, अपान, व्यान, उदान और समान वायु भी नियंत्रित हो। पंच तत्व से बने शरीरके पांचो तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु पूर्णतया स्वस्थ हों। ऐसे व्यक्ति को स्वस्थ्य और निरोगी कहा जाता है। यह तभी संभव है, जब हम नियमित योग करेंगे। आसनों का व्यावहारिक ज्ञान कराते हुए तीसरे दिन पर्वत आसन, हस्त प्रसार आसन, मंडूकासन, शशकासन और प्राणायाम की दृष्टि से उज्जायी और भ्रस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। प्रतिदिन योग के इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं रुचिपूर्वक प्रतिभाग कर रहे हैं। प्राचार्य डॉ. आलोक त्रिपाठी ने कहा कि योग ही स्वस्थ्य जीवन का आधार है। कुलदीप पांडेय ने कहा कि आज के सभी रोगों की दवा योग ही है। इसी तरह पतंजलि योग समिति की ओर से भिदिउरा में आयोजित योग शिविर में साधकों को योगी के बारीकियों से अवगत कराया गया।