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सर्द हवाओं और गलन ने छुड़ाई कंपकपी

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ज्ञानपुर। आसमान में हलके बादलों की मौजूदगी और आठ किलोमीटर प्रति घंटे रफ्तार की सर्द हवाओं के बीच रविवार को कालीन नगरी का न्यूनतम तापमान लुढ़ककर दहाई के अंक से नीचे आ गया। गलन बढ़ने से लोगों को कंपकपी छूट गई। रविवार इस सीजन में अब तक का सबसे ठंडा दिन महसूस किया गया। इस दिन जिले का न्यूनतम तापमान नौ डिग्री रिकार्ड किया गया, जबकि अधिकतम तापमान भी गिरावट के साथ 24 डिग्री सेल्शियस तक पहुंच गया। पहाड़ों में हुई बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी दिखने लगा है। पहाड़ों की ओर से आने वाली ठंडी हवाओं के चलते सर्दी का तेवर अब कड़ा होने लगा है। रविवार को दिनभर शीतलहरी चली। इससे जनजीवन बेपटरी हो गया। दो दिन पहले तक सर्दी में भी गर्मी का एहसास करा रही धूप रविवार को सर्द हवाओं के सामने बेअसर साबित हुई। सुबह कोहरे के गुबार को भी हवाएं अपने साथ उड़ा ले गईं। हवाओं के असर से तापमान लुढ़क गया। रविवार को जिले का अधिकतम तापमान 24 और न्यूनतम तापमान नौ डिग्री दर्ज किया गया, जो दो दिन पूर्व तक क्रमश: 26 और 11 डिग्री सेल्शियस था। रविवार होने के नाते स्कूल-कॉलेज नहीं खुले थे। इससे स्कूली बच्चों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई, लेकिन माना जा रहा है कि मौसम का यही हाल रहा तो स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर ठंड से बचाव के लिए नगर निकायों की ओर से जलवाए जाने वाले अलाव आदि का अता-पता नहीं है। निजी व्यवस्था से जगह-जगह लोग अलाव के सहारे ठंड गुजारते देखे जा रहे हैं। ठंड बढ़ने से कोल्ड डायरिया और उल्टी-दस्त, पेट के मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी है। सरकारी और निजी अस्पताल ठंड के मरीजों की भीड़ से पटने लगे हैं। डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे मौसम में बचाव बेहद जरूरी है। ठंड हवाएं शीत लगने की वजह जल्दी बनती हैं। पेट से जुड़ी समस्याएं हों तो फौरी तौर पर चिकित्सक से सलाह लें। हालांकि खेती-किसानी के लिहाज से बढ़ती ठंड को लाभदायक माना जा रहा है। किसानों का कहना है कि ठंड कड़ाके की नहीं होगी, तो गेहूं की फसल के लिए मुश्किलें खड़ी होंगी।
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