भदोही। रजपूरा में चल रहे रामलीला के दूसरे दिन प्रभु श्रीराम का जन्म, उनके नामकरण, बाल चरित्र, विश्वामित्र आगमन, ताड़का वध, मारीच उद्धार आदि प्रसंगों का सुंदर और विस्तृत मंचन कर कलाकारों ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों ने अपने अपने पात्र से न्याय करने का प्रयास किया, जिसका स्वागत श्रद्धालुओं ने तालियों से किया। प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ तो दर्शक दीर्घा जय श्रीराम के नारे से गूंज उठा। इस दौरान आतिशबाजी के बीच बच्चों में टाफी-बिस्कुल वितरित किए गए। भगवान राम के जन्म के साथ ही जहां राजा दशरथ का चेहरा खिल उठा वहीं दशक दीर्घा में भी लोगों की खुशी का ठिकाना न रहा। बड़ी रानी कौसल्या से राम, कैकेई से भरत व सुमित्रा से लक्ष्मण व शत्रुधन पैदा होने का चहुंओर खुशी का माहौल दिखा। मंगलगान होने लगा। कलाकारों ने नामकरण लीला का जीवंत चित्रण किया। विश्वामित्र का अयोध्या आगमन, राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को साथ ले जाने का आग्रह और बाद में विश्वामित्र का क्रोध में आकर अयोध्या को भस्म करने की धमकी सबकुछ दशक शांत माहौल में आनंद लिए। ताड़का वध और मारीच उद्धार का प्रसंग भी लोगों को खूब भाया। रामलीला से पूर्व कलाकारों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस मौके पर श्री रामलीला परिषद के पदाधिकारी मौजूद रहे और श्रद्धालुओं की सेवा करते रहे।