केंद्र सरकार की परियोजना हाईस्पीड कॉरिडोर कालीन नगरी से होकर भी गुजरेगी। वाराणसी- प्रयागराज रूट पर करीब 45 किमी परिक्षेत्र में 30 गांव प्रभावित होंगे। नेशनल हाई स्पीड रेल डेवलपमेंट कारपोरेशन ने सर्वे रिपोर्ट रेल मंत्रालय को सौंप दिया है। हरी झंडी मिलने पर कॉरिडोर पर काम भी शुरू हो जाएगा। प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल हाईस्पीड कॉरिडोर की शुरूआत से वैसे मुंबई से अहमदाबाद रूट पर शुरू हुआ है। उसके बाद दिल्ली से वाराणसी समेत कई प्रांतों में चयन किया गया है। दिल्ली से वाराणसी के लिए जाने वाले कॉरिडोर में जिले का क्षेत्र भी प्रभावित होगा। प्रयागराज सीमा से सटे अतरौरा हाल्ट से वाराणसी सीमा पर कटका तक करीब 45 किमी कॉरिडोर गुजरेगा। कारपोरेशन के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर पुनीत अग्रवाल ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व केंद्र सरकार ने राजधानी से बाबा काशी विश्वनाथ, विंध्य क्षेत्र की दूरी को कम करने के लिए हाई स्पीड ट्रेन चलाने की घोषणा की थी। गत वर्ष कारपोरेशन की टीम पूर्वोत्तर रेलवे के बनारस-प्रयागराज रेल खंड और उत्तर रेलवे के जंघई-वाराणसी खंड पर सर्वे का कार्य शुरू किया गया था जो अब जाकर पूरा हुआ है। जंघई रेल खंड पर आ रही परेशानियों को देखते हुए बनारस-प्रयागराज खंड पर अंतिम मुहर लगाकर रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है। भदोही जिले में ज्ञानपुर तहसील के ऊंज-मुंगरहा, रामकिशनपुर-बसहीं, दरवांसी, मैलौना, छतमी, आनापुर औराई तहसील के अहिमनपुर, माधोरामपुर, अमवांमाफी समेत 30 गांव उत्तरी लेन पर सर्वे की चपेट में आए हैं। इसकी रिपोर्ट भी जिला प्रशासन को उपलब्ध कराकर मुआवजा के लिए सर्किल दर की मांग की जा चुकी है। बताया कि उत्तरी लेन पर हाई स्पीड ट्रेन के लिए बनने वाले पिलर निजी और सार्वजनिक जमीनों पर कच्चे-पक्के घर, मकान, छप्पर बनाकर रहने वालों को प्रभावित किया है। जिनको मुआवजा देने के लिए फोटोयुक्त घर, मकान, राजस्व खतौनी, आधार कार्ड भी लिया गया है। वर्तमान रेलवे ट्रैक से 10 मीटर की दूरी से लगभग 20 मीटर की परिधि में आने वाले जमीन का ही अधि ग्रहण होगा। दक्षिणी लेन के लिए अभी तक कोई परियोजना न होने से सर्वे नहीं किया जा रहा है।