जिले को संक्रामक रोगों से मुक्त रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में हैं। विभाग ने बीते छह महीने में शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक मलेरिया जांच को लेकर अभियान चलाया। इसमें कुल 27452 लोगों की जांच की गई। राहत की बात रही कि इतने जांच में केवल 10 लोगाें की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हालांकि दूसरा पहलू यह भी है कि निजी चिकित्सालयों में भर्ती अधिकतर मरीज डेंगू या मलेरिया से पीड़ित बताए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर महीने चलाए जा रहे अभियान में आशा, एएनएम ने गांवों व शहरों में डोर टू डोर जाकर बच्चों, महिलाओं और अन्य लोगों की जांच की। इस दौरान संक्रमित बीमारियों के प्रति लोगों को सजग भी किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किट के माध्यम से मलेरिया की जांच की। इससे महज दो मिनट में जांच रिपोर्ट का पता चल जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बीते मार्च महीने से लेकर अगस्त महीने तक जिले में कुल 27452 लोगों की मलेरिया जांच हुई। इनमें केवल 10 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। दूसरी तरफ अगर निजी चिकित्सालयों की बात करें तो वहां लगातार मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। जिसमें अधिकतर मरीज संक्रमित बीमारी से पीड़ित हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, उनको दवा देने के साथ ही जिला मलेरिया विभाग द्वारा लगातार मॉनिटिरिंग की जाती है। जिला मलेरिया अधिकारी राम आसरे पाल ने बताया कि संक्रमित बीमारी से बचाव के लिए संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाकर लोगों जागरूक किया जाता है। इसके बाद भी स्वास्थ्यकर्मी, आशा और एएनएम घर घर जाकर लोगों को जागरूक करती हैं। घर पर गंदगी होने के कारण कई संक्रमित बीमारियां होने के डर बने रहते हैं।