ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव को लेकर महाविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई निर्णय न ले पाने के पीछे साजिश की बू आ रही है। प्रशासन की ओर से एनओसी मिलने के बाद महाविद्यालय की कार्यप्रणाली सवालों में घिरती जा रही है। सत्तासीनों की आंच से केएनपीजी का छात्रसंघ चुनाव मझधार में फंसता दिख रहा है। महाविद्यालय का एक धड़ा जहां चुनाव कराने की जोर आजमाईश में लगा है वहीं दूसरा धड़ा चुनाव को टालने के लिए सत्ता के धुरंधरों से एड़ी चोटी एक कर दे रहा है। पूर्वांचल ही नहीं सूबे में कभी अहम स्थान रखने वाले काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की अपनी अलग ही पहचान है। बसपा सरकार के कार्यकाल को छोड़ दिया जाए तो हर साल यहां छात्रसंघ चुनाव होता था। 2017 के नवंबर- दिसंबर में चुनाव प्रस्तावित था हालांकि निकाय चुनाव को लेकर उसे टाल दिया गया। मिर्जापुर, वाराणसी समेत अन्य जिलों में भी निकाय चुनाव के चलते चुनाव टले लेकिन बाद में उसे करा लिया गया। निकाय चुनाव खत्म होने के बाद भी केएनपीजी के छात्रसंघ चुनाव को लेकर महाविद्यालय प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। महाविद्यालय प्रशासन लिंगदोह के जिन नियमों का हवाला दे रहा है उन्हीं के आधार पर दूसरे जिलों में चुनाव हुए। सुरक्षा को लेकर महाविद्यालय की ओर से एनओसी मांगी गई, जिसे जिलाधिकारी विशाख जी ने दे दी लेकिन अब भी महाविद्यालय प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। सूत्रों की माने तो महाविद्यालय के कुछ पुराने छात्रनेता इस साल छात्रसंघ चुनाव नहीं कराना चाहते। वह सत्तासीनों के सहारे चुनाव को टलवाने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बार अगर चुनाव हुआ तो उनकी मठाधीशी खत्म हो सकती है। प्राचार्य डॉ. रमेश चंद्र यादव ने साजिश के सवालों को नकारा। कहा कि विधिक राय स्पष्ट होने पर चुनाव को कराया जाएगा।