ज्ञानपुर। राज्य कर्मचारियों को दो अक्तूबर तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा देना है, लेकिन जिले के करीब 215 कर्मियों ने अपनी संपत्तियों का ब्योरा नहीं दिया है। जिससे इन कर्मियों के सितंबर माह के वेतन के रुकने के आसार हैं।
कोषागार विभाग ऐसे सभी विभागों के कर्मियों के वेतन बिलों को रोकने की तैयारी में है, जिनका ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं है। ब्यौरा न देने वाले कर्मचारियों का भविष्य में पदोन्नति भी प्रभावित होगा। सरकार ने राज्य कर्मियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। प्रमुख सचिव की ओर से इस संबंध में निर्देश भी जारी किए गए थे। राज्य कर्मियों को इसके लिए एक साल का मौका दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी राज्य कर्मी संपत्ति का ब्योरा देने से कतरा रहे हैं। शासन की ओर से इस मामले में सख्ती की गई।
पहले 31 अगस्त और अब एक महीने का समय देते हुए दो अक्तूबर तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति का ब्योरा दर्ज करने का समय दिया गया। ब्यौरा दर्ज न करने वाले कर्मियों को सितंबर माह का वेतन न देने के आदेश जारी हो गए हैं। जिले में करीब आठ हजार राज्य कर्मचारी हैं। जिसमें सख्ती के बाद अधिकतर ने ब्यौरा दे दिया, लेकिन अब भी 215 ने पोर्टल पर अपनी संपत्ति का ब्योरा अपलोड नहीं किया है। इसमें सबसे अधिक संख्या पंचायत राज विभाग से जुड़े कर्मचारियों की है। कोषागार विभाग ने ऐसे वेतन बिलों को स्वीकार करना बंद कर दिया है, जिन्होंने कर्मियों की संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है, जिसके बाद खलबली मच गई है। मुख्य कोषाधिकारी बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि विभागों की तरफ से हर माह बिल भेजे जाते हैं, जिसके बाद कोषागार से उनका वेतन जारी होता है। जिस विभाग के अधिकारी या कर्मचारी ने चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अपलोड कर दिया है, उसका प्रमाणपत्र बिल के साथ जाएगा। जिन विभागों के कमिर्यों ने ब्योरा अपलोड नहीं किया है, उनका सितंबर महीने का वेतन जारी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर कर्मचारी ब्योरा नहीं देंगे तो उनकी पदोन्नति भी भविष्य में प्रभावित होगी।