ज्ञानपुर। जिले में सीबीआई की धमक के दौरान सुर्खियों में रहा स्वास्थ्य महकमा एक बार फिर धन वसूली और पेपर आउट मामले में हर किसी की जुबां पर है। फार्मासिस्ट समेत दो बाबुओं के निलंबन ने भ्रष्टाचार के खेल को सामने लाकर रख दिया है। हालत यह है कि दशकों से जमे बाबुओं की मठाधीशी ने कल्याणकारी योजनाओं का भी बंटाधार कर दिया है। करीब एक दशक पूर्व राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना में कई हजार करोड़ का घोटाला सामने आने के बाद सीबीआई की धमक जिले में कई साल तक रही। 2010- 11 में घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद सीबीआई टीम जिले में करीब तीन बार आई। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मचारियों और बाबूओं से पूछताछ की गई थी। अब टीजीटी-पीजीटी पेपर आउट मामले में विभाग फिर सुर्खियों में है। स्वास्थ्य विभाग में कई साल से जमे बाबुओं की मठाधीशी से जनकल्याणकारी योजनाओं की कचूमर निकल रही है। योजनाओं में भ्रष्टाचार ने जगह बना ली है। इसमें मुख्य भूमिका बाबुओं की रहती है। तमाम बाबू कई सालों से एक ही पटल पर जमे हैं। ताबड़तोड़ कार्रवाई ने सीएमओ कार्यालय की हलचल बढ़ा दी है। फार्मासिस्ट संग दो बाबुओं के निलंबन के बाद अब तीसरे मास्टरमाइंड बाबू को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्र बताते हैं कि स्वास्थ्य महकमें में व्याप्त भ्रष्टाचार में कलेक्ट्रेट के एक वरिष्ठ लिपिक और विकास भवन के एक बड़े अफसर की संलिप्तता है। साहब के पास जाने से होना तय हो जाता है।