ज्ञानपुर। तीन थानों से घिरे पाली चौकी को थाना बनाने की मांग एक बार फिर मुखर होने लगी है। आम लोगों का न्याय कभी सीमा विवादों में घिर जाता है तो कभी लंबी दूरी तय करने में ही फरियादियों के पसीने छूट जाते हैं। फरियादी थानों के घनचक्कर में ही उलझकर रह जाते हैं। कई थानों से घिरे चौकी के लोगों को न्याय पाने के लिए 15 से 20 किमी तक का चक्कर लगाना पड़ता है। नौ थानों के जनपद में सुरक्षा के मद्देनजर कई चौकियां स्थापित की गई हैं। जिसमें सबसे संवेदनशील चौकियों में पाली को भी गिना जाता है। करीब 50 से अधिक गांव के लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे इस चौकी क्षेत्र में अगर कोई घटना हो जाती है तो फरियादी को 15 किमी दूर सुरियावां, गोपीगंज और ऊंज थाने पर जाना पड़ता है। जिले के पश्चिमी छोर पर पाली से जुड़ा गांव वीरमपुर जो कि सुरियावां थाने में आता है लेकिन यह पाली चौकी से भी जुड़ा है। इसी तरह चौकी से सटे भिड़िउरा गांव गोपीगंज जबकि पूर्वी छोर के गांव ज्ञानपुर कोतवाली से जुड़े हैं। चोरी, उचक्कागिरी, लूट समेत विभिन्न घटनाओं का एफआईआर दर्ज कराने से लेकर अन्य गतिविधियों के लिए फरियादियों को थाने पर जाना पड़ता है। इससे लोगों को ऊंज, सुरियावां, ज्ञानपुर और दुर्गागंज थानों का चक्कर लगाना पड़ता है जो काफी दूर है। ऐसा ही एक मामला दशक भर पूर्व आया था। उस दौरान महजूदा में एक बैंक में लूट की घटना हुई थी लेकिन गोपीगंज और सुरियावां थाने की पुलिस सीमा विवाद के चलते शांत हो गई इसका फायदा उठाकर अपराधी भागने में सफल हो गए। ऐसे कई मामलों में सीमा विवाद के चलते अपराधी सक्रियता से घटनाओं को अंजाम देते हैं। इससे भोरी, महजूू, कसियापुर, गल्हैयां, वारी, सदौपुर, पाली, परशुरामपुर, समेत 50 से अधिक गांव प्रभावित होते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता भरतराज सिंह, सुरेश कुमार, बेचू बिंद, पारस सरोज ने डीजीपी को पत्र भेजने के साथ ही पुलिस अधीक्षक से मांग किया कि पाली चौकी को थाना बनाया जाए।