ज्ञानपुर। बदलती जीवनशैली और बढ़ते प्रदूषण का असर अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ रहा है। जिले में भी अस्थमा मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय और महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय की ओपीडी में हर दिन 180 से 200 मरीज सांस फूलने की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। हालांकि इसमें हर मरीज अस्थमा से पीड़ित नहीं होता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मरीजों में अस्थमा की समस्या तेजी से बढ़ी है।
स्वास्थ विभाग की आंकड़ों की माने तो छह माह पहले तक 120 से 130 मरीज सांस संबंधी समस्याओं को लेकर महराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय और बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल में पहुंचते थे। वहीं अब यह संख्या बढ़कर 180 से 200 के बीच पहुंच गई है। बढ़ते प्रदूषण के कारण लगातार लोगों में यह समस्या बढ़ती जा रही है। बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों तक प्रदूषण की समस्या देखने को मिल रही है। जिससे दिनों-दिन अस्थमा मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सांस से जुड़ी इस बीमारी से पहले अधिक उम्र के लोग ही प्रभावित होते थे, लेकिन अब हर वर्ग में यह समस्या देखने को मिल रही है। जिला चिकित्सालय के चेस्ट फीजिशियन डॉ. घनश्याम श्रीवास्तव बताते हैं कि आमतौर पर जब हम सांस लेते हैं, तब हमारी नाक के माध्यम से हवा गले और फिर वायुमार्ग से होते हुए फेफड़ों तक पहुंचती है। हवा प्रदूषित होने से मरीजों की सांस फूलने लगती है। उन्होंने बताया कि बच्चों में भी अस्थमा बीमारी होती है, हालांकि जो बच्चे बचपन में निमोनिया से ग्रसित रहते हैं और अभिभावक उनके उपचार में लापरवाही बरते हैं। ऐसे बच्चों में अस्थमा होने का खतरा बना रहता है।
इनसेट:
क्या होते हैं लक्षण
अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है। जब मरीज सांस छोड़ते हैं तो खांसी, घरघराहट की आवाज आती है। मरीजों में यह समस्या सबसे आम है। यदि ऐसा लक्षण किसी भी व्यक्ति में दिखे तो तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा खांसी आना, सीने में जकड़न होना, सांस फूलना, थकान महसूस करना, छाती में दर्द होना, तेजी से सांस लेने की दिक्कत भी अस्थमा के लक्षण होते हैं।
-
कैसे करें बचाव
डॉ. घनश्याम श्रीवास्वत बताते हैं कि अस्थमा के मरीजों को सबसे अधिक दिक्कत प्रदूषण से होती है। ऐसे में पीड़ित मरीजों को दिवाली, दशहरा या शादी विवाह के समय पटाखे से उठने वाले धुआं से दूर रहना चाहिए। पीड़ित मरीजों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। खासकर सफर करते समय रूमाल और मॉस्क का जरूर प्रयोग करें। जिससे प्रदूषण युक्त हवा सीधे आपके शरीर में प्रवेश न कर सकें।