ज्ञानपुर। भदोही ब्लॉक के चांदीगहना गांव में फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे बीडीसी बने युवक ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया। उसने त्यागपत्र और शपथ पत्र जिलाधिकारी को सौंपा। डीएम ने त्यागपत्र मंजूर कर डीपीआरओ को भेज दिया। हालांकि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले अफसरों पर कब कार्रवाई होगी, यह सवाल लोगों के मन में अब भी कौंध रहा है। भदोही विकास खंड के वार्ड-129 चांदीगहना एससी जाति के लिए आरक्षित सीट घोषित थी। आरोप है कि वर्ष 2015 में गांव के बलदेव पुत्र स्व. बरसाती ने फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। जनवरी 2018 में गांव के अशोक कुमार तिवारी पुत्र राम चंद्र तिवारी ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर उस पर जालसाजी का आरोप लगाया था। डीएम के निर्देश पर एसडीएम भदोही सुनील कुमार ने प्रमाण पत्रों की जांच की तो सच्चाई खुलकर सामने आई। प्रमाण पत्रों का अवलोकन करने के बाद बलदेव ओबीसी जाति के कहार जाति का पाया गया। जांच रिपोर्ट मिलने पर डीपीआरओ अनिल कुमार त्रिपाठी ने बीडीसी को नोटिस भेजकर 15 दिन के अंदर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा है। निर्धारित समय में स्पष्टीकरण न देने पर बीडीसी को पृथक कर विधिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। बृहस्पतिवार को बीडीसी बलदेव ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। डीएम को दिए शपथपत्र में उसने कहा कि वह शासनादेश के तहत एससी जाति के लिए आवेदन किया था। गोंड जाति का होने से वह एससी में आता है। उसी के तहत राजस्व विभाग की ओर से प्रमाणपत्र जारी किया गया था। अगर उसका प्रमाणपत्र फर्जी है तो जारी करने वाले अधिकारी भी दोषी हैं, उन पर भी कार्रवाई की जाए। डीएम राजेंद्र प्रसाद ने त्यागपत्र को मंजूर करते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार त्रिपाठी को संबंधित कार्रवाई का निर्देश दिया। डीपीआरओ ने कहा कि त्यागपत्र मिल गया है। विभागीय स्तर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।