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तीन तलाक पर राय

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भदोही। तीन तलाक पर जो कुछ हो रहा है, वह राजनीति से प्रेरित है। सरकार ने जो कानून बनाया है, वह गैर जरूरी है। गैरशरई तरीके से जो भी तलाक के मामले हो रहे हैं, वह अपवाद हैं। केंद्र सरकार के तीन तलाक अध्यादेश पर नगर के लोगों की राय कुछ ऐसी ही है। लोगों का मानना है कि यदि सरकार दहेज दानव से महिलाओं को बचाने के बारे में सोचें तो समाज के लिए अधिक फायदेमंद होगा। नगर के पचभैय्या निवासी रुबीना दानिश ने कहा कि कोई भी मुस्लिम महिला अपने पति के खिलाफ नहीं जा सकती। और यदि कोई महिला अपने पति को जेल भेजेगी तो उसका भविष्य कौन संवारेगा? इसलिए मैं इस अध्यादेश के खिलाफ हूं। पीरखांपुर रोड निवासी रोकईया बानो ने कहा कि आज तीन तलाक के कितने मामले हो रहे हैं, पहले इस पर गौर करना चाहिए। इस बात पर भी गौर होना चाहिए कि हमारे समाज में हर रोज कितनी महिलाएं दहेज के लिए जीते जी मार दी जा रही हैं। तीन तलाक पर कानून बनाने से पहले ऐसी महिलाओं को न्याय दिलाने के बारे में सोचा जाना चाहिए। मैं अपने शरीयत से खुश हूं जो 14 सौ साल से चली आ रही है। शमूना मुशीर का कहना है कि कुछ लोगों के शरीयत की गलत व्याख्या से यह स्थिति पैदा हुई उलेमाओं को चाहिए कि इस बारे में जो भी भ्रांति हो इसे दूर करें। कहा कि मैं अपने शरीयत से खुश हूं और अपने शरीयत को मानती हूं। इस अध्यादेश में मुस्लिम परिवारों को विघटित करने की मंशा है। काजीपुर निवासी मौ. सुहैब आलम नदवी ने कहा कि सरकार के कानून में खामियां हैं। अध्यादेश में है कि यदि कोई एक बार में तीन तलाक देता है तो मान्य नहीं होगा। साथ ही ऐसे व्यक्ति के खिलाफ अपराध भी बन जाएगा। सवाल उठाया कि जब तलाक ही नहीं हुआ तो फिर अपराध कहां हुआ? उन्होंने कहा किसी पुरुष के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज हो सकता है, लेकिन उसने तीन तलाक दिया है साबित कैसे होगा।
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