ज्ञानपुर। अभोली विकास खंड के सेमरा हरिकरनपुर गांव में विकास कार्यों की जांच के लिए तीन अफसरों की टीम गठित कर दी गई है। डीएम के निर्देश पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने अधिकारियों की टीम गठित की है। टीम को एक सप्ताह के अंदर जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही पूर्व के दो जांच अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। डेढ़ दशक पूर्व तथ्य बदलकर 14 लोगों को फर्जी पट्टा आवंटन करने के प्रकरण में सेमरा के पूर्व प्रधान मेवालाल जहां जेल जा चुके हैं, वहीं वर्तमान में ग्राम प्रधान उनकी पत्नी की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं हैं। गांव के नन्हेलाल समेत अन्य ग्रामीणों ने करीब चार माह पूर्व डीएम को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि गांव में कराए जा रहे मनरेगा, आवास समेत अन्य कार्यों में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी की गई है। आरोप है कि बेटे की फर्म के माध्यम से गलत तरीके से पैसे की निकासी की गई। शिकायत पर डीएम ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया था। जांच के दौरान बेसिक शिक्षा अधिकारी पर आरोप लगे तो उन्होंने जांच से अपना हाथ खींच लिया। शिकायतकर्ता ने दोबारा डीएम को प्रार्थना पत्र देकर जांच दूसरे अधिकारी से कराने की मांग की। निकाय चुनाव के चलते मामला लटका हुआ था, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ गई है। प्रकरण में जिलाधिकारी विशाख जी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को टीम गठित कर एक सप्ताह में जांच कराकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। डीपीआरओ अनिल त्रिपाठी ने जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी ऋतुराज, बीडीओ अभोली और अवर अभियंता लोक निर्माण विभाग हरि प्रसाद को नामित किया। नामित जांच अधिकारियों से कहा कि एक सप्ताह के अंदर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस प्रकरण में डीएम ने पूर्व के दो जांच अधिकारियों सहायक अभियंता लोक निर्माण और बीएसए से भी स्पष्टीकरण मांगा है। जांच के दौरान उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे थे।