फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मौसम के बिगड़े मिजाज से घटेगी गेहूं की पैदावार

विज्ञापन
विज्ञापन
ज्ञानपुर। खरीफ सीजन में मानसून की मार सह चुके किसानों को रबी सीजन में भी मौसम की मार पड़ती दिख रही है। दिसंबर के पहले सप्ताह में तापमान अधिक होने से कृषि विशेषज्ञ से लेकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम का मिजाज यही रहा तो गेहूं के साथ ही दलहनी फसलों की पैदावार 10 से 20 फीसदी तक घट सकती है। कृषि प्रधान देश में ज्यादातर खेती मानसून पर ही निर्भर रहती है। मानसून की खराबी से अक्सर किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। धान के सीजन में बारिश न होने से 50 फीसदी जहां पैदावार प्रभावित हुई वहीं रबी सीजन में ठंड न पड़ने से पैदावार प्रभावित होने की आशंका बलवती होने लगी है। जिले में करीब 50 हजार हेक्टेअर में खरीफ और रबी सीजन की खेती की जाती है। रबी सीजन में 48 हजार हेक्टेअर में खेती की गई है। जिसमें करीब 42 हजार हेक्टेअर में गेहूं तो छह हजार हेक्टेअर में मटर, चना समेत अन्य दलहनी फसल बोई गई है। पूर्व के वर्षों में नवंबर खत्म होते-होते तापमान 12 के आसपास आ जाता है साथ ही ठंड भी पड़ने लगती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ठंड अधिक होने और तापमान कम होने से गेहूं की पैदावार बेहतर होती है लेकिन बारिश न होने से ठंड भी कम पड़ रही है। जिसके चलते गेहूं और दलहनी फसलों के पैदावार पर असर पड़ना तय है। दिसंबर का पहला पखवारा खत्म होने को आ गया है लेकिन अब भी अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री जबकि न्यूनतम 15 से 17 पर टिका हुआ है। एक पखवारे में मात्र दो दिनों तक ही न्यूनतम तापमान 12 डिग्री पर पहुंचा लेकिन उसके बाद कड़ी धूप होने से स्थिति में परिवर्तन हो गया है। जिला कृषि अधिकारी अशोक प्रजापति ने कहा कि गेहूं के लिए 12 से 15 तक तापमान रहना जरूरी है। अभी शुरूआत है लेकिन माह के अंत तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो पैदावार प्रभावित हो सकती है। चना और मटर में समय से पहले ही फूल आने से उसकी पैदावार जहां प्रभावित होगी वहीं गेहूं के बीज भी कम मात्रा में अंकुरित होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें