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मतदाताओं की चुप्पी ने बढ़ाई टेंशन

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ज्ञानपुर, भदोही। विधानसभा चुनाव की तरह निकाय चुनाव में भी मतदाताओं की चुप्पी ने उम्मीदवारों की टेंशन बढ़ा दी है। वोटर सभी प्रत्याशी को अपने घर से संतुष्ट कर भेज रहा है। सभी अपनी-अपनी जीत की गणित लगा रहे हैं लेकिन मतदान दिवस पर वोट किसको जाएगा यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। 10 से 15 फीसदी लोग ही खुलकर प्रत्याशी के साथ खड़े हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत पांच साल में चुनाव कराया जाता है। मार्च में सूबे में हुए विधानसभा चुनाव के बाद सभी की नजरें निकाय चुनाव पर टिकी थी। मई-जून में चुनाव प्रस्तावित होने से संभावित प्रत्याशी नए साल से ही अपनी जमीन को मजबूत करने में जुट गए थे लेकिन सरकार की ओर से कोई खास पहल न होने से चुनाव आगे बढ़ गया। माह भर पूर्व आचार संहिता प्रभावी होने के बाद प्रत्याशी फिर चुनाव प्रचार में जुट गए। एक नवंबर से लेकर 11 नवंबर तक नामांकन, जांच और प्रतीक आवंटन की प्रक्रिया संपन्न हुई। उसके बाद सभी प्रत्याशी चुनाव चिन्ह के साथ मतदाताओं के पास पहुंच रहे हैं। अध्यक्ष से लेकर सभासद, सदस्य प्रत्याशी भोर में ही लोगों के दरवाजे पर पहुंचकर मनुहार कर रहे हैं, हालांकि मतदाता कुछ खुलकर नहीं बोल रहे हैं। मतदाता सभी प्रत्याशियों के वादों और इरादों को समझकर उनके पक्ष में वोट डालने का आश्वासन दे रहे हैं। इससे उम्मीदवार भी असमंजस की स्थिति में है। चुनाव प्रचार के दौरान सिर्फ 10 से 15 फीसदी ही ऐसे मतदाता हैं जो प्रत्याशी के समर्थक के तौर पर खुलकर सामने आ रहे हैं।
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