ऊंज। क्षेत्र के सिकराहा स्थित श्रीरामलीला मैदान में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन स्वामी मनीष शरण महाराज ने सती चरित्र का प्रसंग सुनाया। कहा कि अगस्त्य मुनि के यहां कथा सुनने गईं सती का मन कथा में नहीं लगा। क्योंकि उनके सामने साक्षात परमात्मा खड़े थे। वह उन्हें नहीं पहचान पाईं और उनसे मन लगा बैंठीं। कहने का सार है कि जीव कि सबसे बड़ी विडंबना है कि वह परमात्मा को जानना तो चाहता है, लेकिन संतों के बताए मार्ग पर नहीं चल पाता, जिससे मिलने के बावजूद वह परमात्मा को नहीं पहचान पाता। इसलिए भगवान को पहचानने के लिए संतों के बताए मार्ग का अनुसरण करना बहुुत जरूरी है। सती का यह सार सुनकर भक्त भावविभोर हो गए। इस मौक पर केंद्रीय ब्राह्मण सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्र, दिनेश मिश्र, जटाशंकर पांडेय, घनश्याम मिश्र, विजय दुबे, तनुश्री मिश्रा, रमाशंकर शुक्ल, सुरेश मिश्र, कृष्णा दुबे, बलराम मिश्र, राहुल पांडेय, सुशील पांडेय आदि रामभक्त मौजूद रहे।