भदोही। आईआईटी बीएचयू के प्रो.प्रदीप श्रीवास्तव ने कहा कि इंजीनियर बनने के बाद नौकरी ढूंढने के बजाए नौकरी देने का लक्ष्य लेकर चलना चाहिए। लेकिन लक्ष्य निर्धारण से पूर्व इस बात का ध्यान रहे कि आपकी लगन और ईमानदारी ही आपको नवउद्यमी बना सकती है। वे शनिवार को भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) में सप्ताह व्यापी नवउद्यमी संवेदीकरण कार्यक्रम में प्रथम वर्ष के बीटेक छात्रों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज कुछ भी मुश्किल नहीं है। उन्होंने ओला, ऊबर फ्लिपकार्ट जैसे ब्रांडो का नाम लेते हुए बताया कि आज सफल होने के लिए विकसित सोच का मालिक बनना होगा। कहा सफलता आसानी से नहीं मिलती लेकिन प्रयास में लगन और ईमानदारी हो तो मुश्किल भी नहीं है। उन्होंने कहा कि अब तक लोग नौकरी पाने के लिए शिक्षा ग्रहण करते थे लेकिन अब एक नई सोच विकसित हुई जिसमें नौकरी देने के लिए शिक्षा ग्रहण किया जाने लगा है। वयोवृद्ध कालीन उद्यमी राजाराम गुप्ता ने कालीन निर्माण से लेकर निर्यात तक संपूर्ण प्रक्रिया पर रोशनी डाली और कहा कि पहले उत्पादन करने वाले को काम मिलता था लेकिन आज गुणवत्ता और नया करने वालों को काम मिलता है। कहा कि इसके लिए विश्व बाजार की जानकारी रखना अतिमहत्वपूर्ण कदम होगा। कार्यक्रम समापन के दिन प्रथम वर्ष के छात्रों को प्रमाण पत्र वितरित करते हुए कालीन निर्यातक और पूर्व एकमाध्यक्ष रवि पाटोदिया ने कहा कि विश्व अब खुले बाजार का रूप ले चुका है। मानक और गुणवत्तायुक्त उत्पाद बाजार मे पैर जमा ही लेंगे। छात्रों ने विशेषज्ञों से अपने सवालों के जवाब लिए। निर्यातक हाजी अब्दुल हादी अंसारी, संस्थान के निदेशक प्रो.केके गोस्वामी ने भी संबोधित किया।