ज्ञानपुर। कार्यदायी संस्थाओं की उदासीनता से जिले में 150 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की रफ्तार सुस्त हो चुकी हैं। समय सीमा पूर्ण होने के कई साल बाद भी 70 से 80 फीसदी काम हो सका है। इससे आम लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, लघु सेतु, पेयजल, बिजली की 50 से अधिक और कुल 250 करोड़ से ज्यादा लागत की परियोजनाओं का काम चल रहा है। निर्माण एजेंसी समाज कल्याण, लोक निर्माण, राज्य सेतु निगम, सीएनडीएस, वेलस्पन, जीए इंफ्रा को इनको पूरा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन के निर्देश पर डीएम गौरांग राठी समय-समय पर मानीटरिंग कर निर्देश भी दे रहे हैं, लेकिन कार्यदायी संस्थाएं काम को लेकर लापरवाह बनी हैं। आलम यह है कि कुछ परियोजनाओं का लोकार्पण हो चुका है, लेकिन काम अब भी अधूरा है।
जल जीवन मिशन की 70 करोड़ से अधिक की 25 परियोजनाएं मार्च में पूर्ण होनी थी, लेकिन अब भी 50 से 60 फीसदी ही काम हो सका है। छह लघु सेतु भी मई 2022 में पूर्ण होने थे, लेकिन अब भी 40 से 50 फीसदी कार्य हो सका है। चकगुमानी में 17 करोड़ की लागत से आश्रम पद्धति विद्यालय का काम वर्ष 2013-14 में शुरू हुआ। 2016 तक उसे हैंडओवर होना था, बावजूद इसके छह साल बाद भी वह पूरा नहीं हो सका। सुरियावां, ज्ञानपुर सहित चार थानों में बैरक और आवास का काम अभी भी अधूरा है। पेयजल योजना, पशु पाली क्लीनिक आवास, लघु सेतु सहित 150 करोड़ की परियोजनाओं के कार्यों की रफ्तार इतनी कम है कि जल्द पूर्ण होने की उम्मीद नहीं है।
ज्ञानपुर। जिले में चार बड़ी परियोजनाएं भ्रष्टाचार के फेर में फंसकर विलंबित हो गई है। भदोही में करीब 10 करोड़ की दो पॉलिटेक्निक कॉलेज, 100 शैय्या अस्पताल और सीएचसी दुर्गागंज में धांधली के कारण एसआईटी जांच हो रही है। जिससे 30 करोड़ की परियोजनाएं आठ से 10 साल बाद भी पूर्ण नहीं हो सकी है।
लंबित परियोजनाओं की समय-समय पर समीक्षा की जा रही है। चुनाव में अधिकारियों की ड्यूटी लगने से अभी समीक्षा नहीं हो पा रही है। चुनाव बाद लंबित परियोजना की कार्यदायी संस्थाओं पर कार्रवाई होगी- संतोष कुमार, जिला अर्थसंख्या अधिकारी।