ज्ञानपुर। रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग रोकने के लिए सरकार के साथ ही जिले के प्रगतिशील किसान भी पीछे नहीं है। कृषि क्षेत्र में जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे कुछ किसानों ने जैविक खेती से पैदावार बढ़ाने के साथ ही छुट्टा मवेशियों से फसलों को बचाने का फार्मूला तैयार किया है। इससे नीलगाय, छुट्टा मवेशी खेतों में कदम नहीं रखेंगे। फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए रासायनिक खाद का किसान अधिक प्रयोग करते हैं। कीटन्-पतंगो को खत्म करने के लिए कीटनाशकों का भी प्रयोग करते हैं। जिससे फसलों, पर्यावरण और मिट्टी पर प्रतिकूल असर पड़ता है। सरकार कृषि विभाग की तमाम योजनाओं के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। अनुदान देकर वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के साथ ही अन्य योजनाएं चल रही है। कृषि में प्रतिनिधित्व कर रहे किसान राम अकबाल तिवारी, श्यामधर सिंह, अनिल सिंह, रामबली पाठक, रामानंद मिश्रा, किशोर चंद्र बरनवाल आदि जैविक खेती से फसलों की पैदावार बढ़ा रहे हैं। राम अकबाल तिवारी ने जैविक फार्मूले से फसलों को बचाने की विधि के बारे में बताया। कहा कि छुट्टा पशुओं और नीलगाय से फसलों को बचाने के लिए बायोडीजल (जैट्रोफा) की पत्ती पांच किलो, गोमूत्र पांच लीटर को दो लीटर पानी में सड़ाकर एक लीटर दवा को 20 लीटर पानी में डालकर फसलों पर छिड़काव करें। इससे फसलों में जहां कीड़े नहीं लगेंगे वहीं मवेशी भी नहीं खाएंगे। करीब 20 दिन तक फसलों पर इसका प्रभाव रहेगा। किसान 20 दिन के अंतराल पर छिड़काव करेंगे तो बेहतर होगा। उन्होंने बताया कि ढाई सौ ग्राम गुड़, 200 ग्राम बबूल का गोंद, दो लीटर गोमूत्र को मिलाकर 20 किलो बीज को शोधित कर सीधी बुआई करें तो पैदावार में भी इजाफा होगा।