ज्ञानपुर। झोलाछाप लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। हादसों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग मौन साधे हुए है। झोलाछाप चिकित्सकों का सिंडिकेट विभागीय संरक्षण में तेजी से फलफूल रहा है। गंभीर मरीजों से पैसे ऐंठने के बाद कमीशन के लिए भी निजी अस्पतालों में भेज देते हैं। कार्रवाई के नाम पर हर साल स्वास्थ्य विभाग नोटिस का तामिला कराकर इतिश्री कर लेता है। जिले में सरकारी अस्पतालों के साथ 50 से अधिक निजी अस्पताल एवं नर्सिंग होम संचालित होते हैं। हालांकि ग्रामीण इलाकों में अब भी झोलाछाप अपनी पैठ जमाए हुए हैं। गोपीगंज के एक झोलाछाप की लापरवाही से 12 वर्षीय बालक की मौत के बाद भले ही मुकदमा दर्ज हो गया, लेकिन गली-गली खुली नीम-हकीम की दुकानें धड़ल्ले से लोगों की जान जोखिम में डाल रही हैं। दो साल पूर्व माधोसिंह के त्रिलोकपुर नहरा के समीप संचालित अवैध अस्पतालों में कुछ महीने के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हुई, हालांकि संचालकों ने मामले को संभाल लिया। यह घटनाएं तो बानगी है। हर साल झोलाछाप के चक्कर में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जिले में इतना कुछ होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की झोलाछाप के खिलाफ खानापूर्ति वाली कार्रवाई ही सामने आती है। जिससे झोलाछाप के हौसले बुलंद हैं और वो नोटिस मिलने के बाद भी दुकानें खोल लेते हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मी सिंह ने कहा कि ऐसे लोगों के पास आम लोगों को जाना नहीं चाहिए। झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई के लिए टीम गठित की गई है। अभियान चलाकर ऐसी दुकानों को बंद कराया जाएगा।