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धनुष यज्ञ का प्रसंग सुनकर मंत्रमुग्ध हुए स्त्रोता

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ज्ञानपुर। नगर के सिंहपुर स्थित गदाधारी हनुमान मंदिर पर आयोजित रामकथा में कथावाचक दीनानाथ शास्त्री महराज ने सोमवार को धनुषयज्ञ का प्रसंग सुनाया। मार्मिक प्रवचन सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने बताया कि जनकपुर में सीता स्वयंवर में धनुष पर चाप चढ़ाने की शर्त न पूरी होती देख राजा जनक चिंतित हो गए। इसके बाद भगवान श्रीराम के शिवधनुष तोड़ने और महर्षि परशुराम के क्रोधित होने का प्रसंग विस्तार से सुनाया। यह प्रसंग सुन पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारे से गूंज उठा। इस दौरान उन्होंने राम के आदर्शों के बारे में बताते हुए कहा कि वह मर्यादा पुरुषोत्तम होने के साथ ही तीनों लोकों के ज्ञाता और स्वाभिमानी थे। धर्म के मार्ग पर चलते हुए वह रावण जैसे योद्धा को पराजित कर माता सीता को वापस अयोध्या ले आए। वहीं विभीषण को दिए वचन के अनुसार उन्हें लंका का राजमुकुट पहनाया। इस प्रकार से धनुष यज्ञ के साथ श्रीराम के बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर मंदिर के पुजारी सिद्घेश्वर महराज, अनिल पांडेय, साहब लाल, पिंटू पांडेय, लाली पांडेय, राजन दूबे, दिवाकर शुक्ला आदि रहे।
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