ज्ञानपुर। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी प्राचीन जलाशयों पर हो रहा अतिक्रमण रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं मनरेगा के तहत लाखों खर्च होने के बाद भी न तो दशा बदल सकी और न ही दिशा। कुछ ऐसा ही नजारा डीघ ब्लॉक क्षेत्र के गोधना गांव स्थित राजमार्ग से सटे प्राचीन तालाब की है। बताया जाता है कि दो दशक पहले जो तालाब लोगों की पहचान कायम रखता था, आज स्वयं की पहचान बचाने के लिए शासन और प्रशासन के ठोस पहल का इंतजार कर रहा है। राजमार्ग से जुड़े होने के कारण अपनी महत्ता स्थापित कर चुके तालाब के चहुंओर अतिक्रमण, गंदगी और पानी का अभाव हमेशा बना रहता है। लोगों का कहना है कि पहल हो तो पहचान बचाई जा सकती है।