चौरी। इलाके के लठिया में 10 दिवसीय रामलीला शनिवार से शुरू हो गई। रामलीला समिति के कार्यकारी सदस्य धीरज तिवारी ने फीता काटकर इसका शुभारंभ किया। पहले दिन देवराज इंद्र के डर और नारद मोह का मंचन किया गया। देवर्षि नारद पृथ्वी लोक का भ्रमण करते समय हिमालय के मनोहर दृश्य को देखकर तपस्या में लीन हो गए। इस पर देवराज इंद्र को लगा कि नारद उनके सिंहासन के लिये ही तपस्या कर रहें हैं । नारद की तपस्या भंग करने के लिए देवराज कामदेव को भेजते हैं, लेकिन वह इसमें सफल नहीं होते हैं। अंत में वह देवर्षि के चरणों पर गिरकर क्षमा याचना करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु ने मायानगरी का निर्माण किया जहां शीलनिधी नामक राजा अपनी पुत्री का स्वयंवर रखते हैं। इसमें देवर्षि नारद शादी की आकांक्षा लेकर पहुंचते हैं। प्रभु नारायण से आकर्षक चेहरा मांगते हैं लेकिन प्रभु ने देवर्षि को बंदर का चेहरा प्रदान किया। राजा की बेटीने स्वयंवर में वरमाला को देवर्षि के गले में न डालकर भगवान विष्णु के गले में डाल दिय। इससे अपमानित होकर देवर्षि ने नारायण को श्राप दे दिया कि जिस प्रकार बंदर मुख देकर आपने मेरा उपहास कराया है, एक दिन पत्नी वियोग में उन्ही बंदर से तुम्हे मदद लेनी होगी। रामलीला का यह मंचन देख सभी भाव विभोर हो गए। इस मौके पर सभाशंकर त्रिपाठी, कृष्णकांत त्रिपाठी, धीरज त्रिपाठी, धनीशंकर यादव, प्रदीप चौबे, अरबिंद तिवारी, दयाशंकर शाहू, छोटे लाल आदि रहे।