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375 आंगनवाड़ी और सहायिकाओं का रोका मानदेय

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ज्ञानपुर। आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद कर परियोजना कार्यालयों पर आंदोलन कर रही करीब पौने चार सौ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं पर प्रशासनिक शिकंजा कसना शुरू हो गया है। ब्लॉकों की रिपोर्ट पर 375 आंगनबाड़ी और सहायिकाओं का मानदेय रोक दिया गया है। साथ ही सेवा समाप्ति की कार्रवाई के लिए निदेशालय से गाइड लाइन मांगी गई है। वहां से अनुमति मिलने पर कठोर कार्रवाई की जा सकती है। कुपोषित बच्चों और धात्रियों की सेहत सुधारने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों की देखरेख के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की नियुक्ति की जाती है। जिले में करीब 1300 आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन हजार आंगनबाड़ी और सहायिकाएं कार्यरत हैं। मानदेय बढ़ाने के साथ ही तमाम सुविधाओं का लाभ देने के लिए पूर्व में आंदोलन कर चुकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं गत डेढ़ माह से आंदोलन कर रहीं हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का परियोजना कार्यालयों पर बेमियादी धरना चल रहा है। इस दौरान निकाय चुनाव, वजन दिवस समेत अन्य कार्यों का बहिष्कार भी किया। प्रशासन के तमाम निर्देश के बाद भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने धरना-प्रदर्शन बंद कर आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन शुरू नहीं किया। उच्चाधिकारियों के बार-बार कहने के बाद भी केंद्रों का ताला नहीं खुला तो विभागीय स्तर से कार्रवाई शुरू कर दी गई। प्रभारी डीपीओ अमृता सिंह ने परियोजना कार्यालयों से अनुपस्थित आंगनबाड़ी एवं सहायिकाओं की रिपोर्ट मंगाई। भदोही, सुरियावां, अभोली और औराई परियोजना कार्यालय से रिपार्ट में करीब 375 आंगनबाड़ी और सहायिकाएं आंदोलन करती मिलीं। जिलाधिकारी के निर्देश पर डीपीओ अमृता सिंह ने सभी का मानदेय रोक दिया। उन्होंने कहा कि निदेशालय को पत्र भेजकर प्रभावित हो रहे काम के बारे में बताया गया है। इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए भी गाइड लाइन मांगी गई है।
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