ज्ञानपुर। कालीन नगरी में मच्छरों के आतंक से मलेरिया और डेंगू जैसी घातक बीमारियों ने पांव जमा लिए हैं। तीन दिन पहले तीन मरीजों में डेंगू से लक्षण पाए गए थे। इनमें एक विवाहिता की मौत भी हो चुकी है। मलेरिया के मरीज रोज अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। पिछले महीने जिले में सरकारी रिकॉर्ड में मलेरिया के 63 मरीज सामने आए थे। जनवरी से अगस्त तक आठ माह में जिले में मलेरिया के 341 मरीज सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराए गए। इसमें निजी अस्पतालों का आंकड़ा शामिल नहीं है। लगातार मरीजों की तादाद बढ़ने के बाद भी मच्छरों के रोकथाम के कारगर उपाय नहीं किए जा रहे। जिम्मेदार विभाग और अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। जगह-जगह जलभराव, कीचड़ और गंदगी के चलते मच्छरों का हमला बढ़ गया है। इससे आमजन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रोकथाम के लिए सरकारी विभागों के दावों के बीच मलेरिया और डेंगू जैसी खतरनाक बीमारियां लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं। पिछले आठ माह से मलेरिया के मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया लेकिन जिम्मेदार अफसर बेफिक्र बने हुए हैं। जनवरी से अगस्त तक मलेरिया के मरीजों का सरकारी आंकड़ा 341 तक पहुंच गया। जुलाई और अगस्त में मरीजों की तादाद सबसे ज्यादा रही। यही नहीं, डेंगू ने भी पांव पसार लिए हैं। डेंगू के तीन मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से एक की जान भी जा चुकी है। औराई क्षेत्र के तियुरी गांव में चार दिन पूर्व दो मरीजों में डेंगू के लक्षण मिलने पर परिजनों ने उन्हें वाराणसी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। इनमें एक मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके पूर्व जून में जंगीगंज क्षेत्र के कुलमनपुर गांव में विवाहिता सीमा मौर्या (38) की डेंगू से मौत हो गई थी। इसके अलावा भदोही नगर के मर्यादपट्टी की तरन्नुम जहां और चौरी क्षेत्र के रामदेव पट्टी गांव निवासी अनुज त्रिपाठी को भी डेंगू की चपेट में आने के बाद भर्ती कराया गया था। सरकारी और निजी अस्पतालों में इन दिनों हर रोज मलेरिया के मरीज भर्ती कराए जा रहे हैं।