ज्ञानपुर। गांवों में हैंडपंप रिबोर कराने में धांधली की बू आने लगी है। कई पत्र भेजने के बाद भी जिले की सभी 561 ग्राम पंचायतों की ओर से सूची एवं खर्च का ब्योरा नहीं दिया गया। ग्राम पंचायतों में दो वित्तीय वर्ष में कराए गए हैंडपंपों के रिबोर की सूची नहीं देने से डीएम नाराज हो गए हैं। मामले को संज्ञान में लेते हुए डीपीआरओ ने जिले के सभी 103 ग्राम पंचायत अधिकारियों और ग्राम विकास अधिकारियों का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया है। गांवों में हैंडपंप मरम्मत एवं रिबोर का कार्य पहले जल निगम की ओर से कराया जाता था, लेकिन तीन साल पहले सरकार ने यह कार्य ग्राम पंचायतों को दे दिया। 14वें वित्त के पैसे से गांवों में खराब हैंडपंप के मरम्मत और रिबोर कराने का निर्देश दिया गया। 561 गांवों के प्रधान और सेक्रेटरी ने खराब हैंडपंपों को सही कराया, लेकिन बड़ी संख्या में सेक्रेटरी और प्रधान सिर्फ कागजों पर ही रिबोर कर खर्च को निकाल लिया। कुछ माह पहले डीएम राजेंद्र प्रसाद ने जिला पंचायत राज विभाग से वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18 और 2018-19 में हैंडपंप रिबोर और मरम्मत की सूची मांगी तो गड़बड़ी का अंदेशा बढ़ने लगा। करीब चार माह गुजरने के बाद भी ग्राम पंचायतों की ओर से न तो रिबोर हैंडपंपों की सूची दी गई और न ही उस पर आए खर्च का ब्योरा। कई बार पत्र भेजने के बाद भी सेक्रेटरी और वीडीओ स्तर से सूची उपलब्ध नहीं कराई गई। इसको लेकर डीएम ने नाराजगी जताई तो पंचायत राज विभाग ने कार्रवाई शुरू की। डीपीआरओ ने प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए जिले के सभी 103 सेक्रेटरी और बीडीओ का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया। निर्देश दिया कि जब तक रिबोर हैंडपंप और खर्च की सूची उपलब्ध नहीं कराई जाएगी, तब तक वेतन बहाल नहीं किया जाएगा। बताते चलें कि गांवों में हैंडपंप रिबोर और मरम्मत पर 10 हजार से लेकर 35 हजार तक खर्च करने की गाइडलाइन तय की गई है। मामूली खराबी को भी अधिक दिखाकर सेक्रेटरी और प्रधान ने सरकारी धन में गड़बड़ी की। पंचायतों से अगर सूची उपलब्ध कराई तो जांच कराने पर कई लोगों की गर्दन फंस सकती है।