ज्ञानपुर। जिले में भंडारण संकट और मिलरों की लापरवाही के कारण 10 हजार एमटी सरकारी चावल राइस मिलों में डंप पड़ा है। खाद्य एवं विपणन अधिकारी ने पांच मिलरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जबकि डीएम ने दो रैक चावल भेजने के लिए एफसीआई के प्रबंधक को पत्र लिखा है। जिले में धान खरीद के लिए कुल 51 क्रय केंद्र खोले गए थे। इसके बाद फरवरी में खरीद बंद होने तक एक लाख 10 हजार एमटी के सापेक्ष एक लाख 20 हजार एमटी की खरीद हो गई। सरकार की ओर से केंद्रों पर खरीदे गए धान को चावल बनाने के लिए प्राइवेट मिलरों यहां भेज दिया जाता है। जिले में चावल तैयार करने के लिए 31 मिलरों को जिम्मेदारी दी गई है। धान खरीद बंद होने के बाद भी 10 हजार एमटी से अधिक चावल मिलरों के यहां डंप है। विपणन विभाग के मुताबिक 1.20 लाख एमटी धान से 82 हजार एमटी चावल तैयार कर सरकारी गोदामों में भेजना था, लेकिन 72 हजार एमटी ही चावल एफसीआई के गोदाम में पहुंच सका। इस संबंध में जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी श्याम कुमार मिश्रा ने कहा कि शुरूआती दौर में कुछ मिलरों ने लापरवाही बरती। तेजी से काम करने वाले मिलर चावल को हरियावं और बभनौटी स्थित गोदाम में भेज दिया। अब जगह न होने के कारण पांच मिलरों के यहां 10 हजार एमटी चावल फंसा है। लापरवाही के कारण राजपूत राइस मिल बहुता चकडाही, अमित राइस मिल औराई, मिश्रा राइस मिल मिल्की, रुद्रांश राइस मिल नथईपुर और श्याम ट्रेडर्स को नोटिस जारी की गई है। उन्होंने बताया कि गोदाम खाली करने के लिए जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने एफसीआई के प्रबंधक गिरीश कुमार को पत्र लिखा है। पूर्व में चार रैक चावल भेजा जा चुका है। दो रैक चावल जाने से गोदाम खाली हो जाएंगे। वहीं कुछ मिलरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चावल गोदाम पर भेजने के बाद कई दिनों तक ट्रक खड़े रह जाते हैं। जिससे उनको काफी नुकसान उठाना पड़ता है।