ज्ञानपुर। जिले के 2263 किसानों पर सहकारी समितियों और बैंकों का 10 करोड़ रुपये बकाया है। अब विभाग ने नोटिस जारी कर समय से भुगतान करने की चेतावनी दी है। इसके साथ ही कर्ज पर खाद और बीज देने पर रोक लगा दी। अब नकद भुगतान करने पर ही किसानों को सुविधा दी जाएगी, हालांकि एक लाख से कम ऋण होने के कारण विभाग चाहकर भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए जिले में 52 सहकारी समितियां संचालित की गईं। इन समितियों के माध्यम से पंजीकृत किसान सदस्यों को कर्ज पर खाद,बीज आदि की सुविधा दी जाती थी। यही नहीं सहकारी बैंकों के माध्यम से उन्हें ऋण देकर आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है। किसानों से वसूली के लिए सहकारिता विभाग में स्थायी के अलावा कमीशन पर कर्मचारी रखे गए हैं। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 52 समितियों पर 50 हजार से अधिक किसान पंजीकृत थे लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होती गई। अब तक 2263 किसानों पर समितियों और बैंकों का 10 करोड़ से अधिक धनराशि बकाया है। बकाया अधिक होने के कारण समितियों पर अब किसानों को कर्ज पर खाद-बीज देने की व्यवस्था बंद कर दी गई। सहायक निबंधक सहकारिता राघवेंद्र शुक्ला का कहना है कि किसानों पर एक लाख से कम बकाया होने के कारण कोई दंडात्मक कार्रवाई तो नहीं हो पाती है लेकिन चेतावनी के रूप में नोटिस आदि की कार्रवाई की जाती है। कभी- कभी तो उनके घरों पर भी बकाया राशि को चस्पा कर दिया जाता है। इसके बाद भी किसान बकाया का भुगतान नहीं करते हैं। अमीन लगातार बकाया की वसूली के लिए उनके घर पर दबिश देते रहते हैं। बताया कि 30 समिति पूरी तरह सक्रिय हैं जबकि 22 पर इन दिनों खाद और बीज की आपूर्ति ठप है। विभाग की ओर से 104 बड़े बकाएदारों से खुद वसूली के लिए नोटिस जारी किया है। इसमें भदोही में 24, औराई में 28, ज्ञानपुर 52 कर्जदार शामिल है। शेष 2159 कर्जदारों की सूची संबंधित तहसील में कार्यरत राजस्व अमीन को जारी किया है। एआर सहकारिता ने बताया कि सहकारिता विभाग अंतर्गत कार्यरत सहकारी समितियों, जिला सहकारी एवं भूमि विकास बैंकों से 2263 कृषक कर्ज लेकर खेतीबारी कर रहे हैं। अदायगी न होने से ब्याज बढ़ कर 10 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है। सहकारिता विभाग की सूची में 2263 कर्जदार कृषकों को राहत देते हुए प्रदेश सरकार ने एकमुश्त समाधान योजना शुरू की है। इसकी अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित है। एआर सहकारिता राघवेंद्र शुक्ला ने कहा कि कर्जदार कृषकों का वर्गीकरण करते हुए एकमुश्त समाधान योजना में भी शामिल कर लिया गया है। 31 मार्च 1993 तक का बकाया जमा करने पर मूल एवं संग्रह धनराशि, एक अप्रैल 1997 से 31 मार्च 2012 तक का बकाया जमा करने पर मूल धन के बराबर ब्याज रुपी संग्रह धनराशि वसूल होगी।