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तीन साल में भी नहीं पूरा हुआ काम, शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे 25 हजार लोग

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गांधीनगर में स्थापित ओवरहेड टैँक। - फोटो : BASTI
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तीन साल में भी नहीं पूरा हुआ काम, शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे 25 हजार लोग
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हाल-ए- अमृत पेयजल योजना : 5773 घरों को मिलना है योजना का लाभ
साल भर से हो रहा आठ वाटर हेड टैंकों का निर्माण
शहर में नौ जगहों पर नलकूपों की हो रही बोरिंग, 76 किमी पाइप लाइन बिछाई गई है
बस्ती। शहर में अमृत पेयजल परियोजना का काम तीन साल में भी पूरा नहीं हो सका है। इसके चलते शहर की करीब 25 हजार की आबादी शुद्ध पेयजल से वंचित है। शहर के कुल 5773 घरों को इससे जुड़ना है, मगर परियोजना पूरी न होने के कारण अभी घरों में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है।
नगर पालिका क्षेत्र में जल निगम ने अमृत पेयजल परियोजना के तहत 23 करोड़ रुपये का स्टीमेट तीन साल पहले अक्तूबर 2019 में शासन को भेजा था। शासन ने स्टीमेट स्वीकृत कर कार्य कराने का निर्देश जारी किया तो टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के चलते दोबारा टेंडर करना पड़ा। दूसरी तरफ कोरोना के कारण लॉकडाउन में भी कोई काम नहीं हो सका। इससे समय का बड़ा नुकसान हुआ। सितंबर 2020 में प्रयागराज की दो नामी कंपनियों ने काम शुरू किया। एक्सईएन के मुताबिक शहर के नौ स्थानों पर नलकूपों की बोरिंग करवाई गई है और आठ जगहों पर वाटर हेड टैंकों का निर्माण किया जाना था, जिसमें छह जगह काम पूरा हो चुका है और दो जगह टैंक का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। इसके अलावा पंप हाउस, ऑपरेटर रूम व अन्य निर्माण किए जा रहे हैं। शहरी क्षेत्र में 76 किमी पाइप लाइन बिछाई गई है।
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जून 2022 तक पूरा होना था कार्य
अमृत पेयजल योजना का कार्य इसी जून महीने तक पूरा होना था, लेकिन अब इसके लिए छह माह का अधिक समय लगेगा। इस बारे में योजना के अधिशासी अभियंता जल निगम रेहान फारुखी ने बताया कि लॉकडाउन के कारण व एक टैंक की जमीन समय से न उपलब्ध हो पाने के कारण योजना पूरी होने में छह महीने की देरी हो रही है। दिसंबर 2022 तक अमृत पेयजल योजना का सभी काम पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके लिए अभियंताओं की टीम को लगातार निगरानी के लिए लगाया गया है।
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