महिला अस्पताल परिसर में वट वृक्ष की पूजा करतीं महिलाएं।
बस्ती। अखंड सुहाग की कामना को लेकर शुक्रवार को सुहागिनों ने वट वृक्ष की पूजा की। स्नान ध्यान के बाद महिलाएं नए वस्त्र धारण कर हाथों में पूजा की थाली लिए टोली की शक्ल में वट वृक्ष के नीचे पहुंच कर पूजा-अर्चना की। तत्पश्चात महिलाओं सावित्री एवं सत्यवान की कथा भी सुनीं। वहीं वट वृक्ष के तना में 108 बार कच्चा धागा से वट वृक्ष का फेरा लगाया। बहुत सारी महिलाएं बरगद के पेड़ के पास नहीं जा कर घर-आंगन में ही बरगद की डाली का पूजा अर्चना की। वहीं बहुत सारी महिलाएं ऐसी भी थीं, जो बरगद के पेड़ के नीचे पूजा अर्चना की।
पर्व की महता पर प्रकाश डालते हुए आचार्य ओम प्रकाश शास्त्री ने कहा कि वट सावित्री पूजा सुहागिनों के अखंड सौभाग्य प्राप्त करने का प्रामाणिक और प्राचीन व्रत है। धर्म ग्रंथों में इस बात का उल्लेख है कि व्रत करने से अल्पायु पति भी दीर्घायु हो जाता है। बताया कि जब सत्यवान की आत्मा को यमराज लेने पहुंचे थे, तब उनकी पत्नी सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ी। यमराज के काफी समझाने के बाद भी जब वह वापस नहीं लौटी, तब विवश होकर यमराज ने सत्यवान की आत्मा का प्रवेश उसके मृत शरीर में करवा दिया। उसी समय सावित्री ने वट सावित्री की पूजा की थी। इधर शहर में विभिन्न स्थानों पर वट सावित्री की पूजा अर्चना की गई। व्रत को लेकर महिलाओं में खूब उत्साह देखा गया है।