बस्ती। मंडल मुख्यालय पर 48 घंटे से जलापूर्ति ठप है। बावजूद इसके न तो जल निगम सुधि ले रहा है और न ही जलकल ही सक्रिय हो रहा है। लिहाजा पानी के लिए आधा शहर करीब 70 हजार की आबादी पानी के लिए तरस रही है। लोग हैंडपंप से पानी ले रहे हैं। मामला जलकल के संज्ञान में है, मगर अब तक काम पूरा नहीं हो सका है।
शहरी क्षेत्र में एक निजी गैस कंपनी पाइप लाइन बिछाने का कार्य कर रही है। जेसीबी खोदाई करते समय जगह-जगह जलापूर्ति की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो जा रही है। पूरा पानी सड़कों पर पसर रहा है। स्थिति यह है कि चार दिन पहले कटरा में पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई ,लेकिन दोबारा जलापूर्ति बहाल नहीं हुई। 10 दिसंबर को जब सिविल लाइंस स्थित डीएम आवास के सामने गैस कंपनी की जेसीबी ने पेयजल आपूर्ति की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त कर दिया, तब भी जिम्मेदारों ने सुधि नहीं ली।
नतीजा यह हुआ कि यहां भी डीएम आवास से लेकर कबीर तिराहा तक सड़क जलमग्न हो गई, मगर नतीजा ढाक के तीन पात रहे। शहर में कई मोहल्लों में जलापूर्ति ठप हो गई और अब तक बहाल नहीं हुई। लोक नलों के सहारे हो गए हैं। नगर पालिका की अध्यक्ष नेहा वर्मा ने बताया कि समस्या संज्ञान में है। जल्द ही जलापूर्ति बहाल करा दी जाएगी।
जलकल की जेई अर्चना कुमारी ने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद दो दिन अवकाश के चलते कर्मी नहीं आए। सोमवार से काम चल रहा है। 24 घंटे में अधिकतर मोहल्लाें में आपूर्ति बहाल हो जाएगी। इसका स्थायी समाधान किया जा रहा है।
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बोले नागरिक
दो दिन से अधिक का समय हो गया, मगर जलापूर्ति बहाल नहीं हुई। घर में मोटर लगा है तो पानी की दिक्कत नहीं आई। कई बार फोन पर शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन निदान नहीं हुआ।
ओंकारनाथ, विवेकानंद कॉलोनी
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सबसे ज्यादा दिककत उन घरों में है, जहां घर में जलकल के पानी के अलावा कोई इंतजाम नहीं है। तमाम लोगों को तो मैंने अपने घर से पानी ले जाने को कहा है।
वीरेंद्र श्रीवास्तव, उत्तरी आवास विकास कॉलोनी
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पानी हो या सड़क अपने शहर में दोनों पर ग्रहण लगा है। दो दिन से पानी पर भी ब्रेक लग गया है। 24 घंटे में जलापूर्ति की बात कही जा रही है।
डॉ. मनोज कुमार, पिकौरा बक्श
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48 घंटे से अधिक का समय हो गया, मगर अब तक जलापूर्ति बहाल नहीं हुई। पड़ोसियों से पानी लेकर काम चला रहे हैं।
संदीप कुमार, बैरिहवां