बस्ती। मैं प्रधान प्रतिनिधि हूं, मेरी पत्नी प्रधान हैं। पंचायत में जितने भी विकास कार्य होते हैं, सब प्रधान जी की सहमति से ही होते हैं। मै बस उसे पूरा करता हूं। यह शब्द गौर ब्लॉक क्षेत्र के मिरवापुर की प्रधान उमा भारती के पति काशीराम के हैं। इसी क्षेत्र के ग्राम पंचायत भीटा की प्रधान प्रभावती का भी कुछ ऐसा ही हाल है। फोन पर संपर्क किया गया तो उनके पति शिवलाल ने कहा कि वह ही प्रधान हैं और पंचायत का सारा कामकाज वही देखते हैं।
जिले की कुल 1185 पंचायतों में से करीब 392 की कमान महिला प्रधानों के हाथों में है। पंचायत चुनाव में आरक्षण के बाद महिलाओं को प्रधान बनने का मौका तो मिला, लेकिन कई जगह प्रधानी की बागडोर उनके पति, पुत्र, ससुर, भाई, देवर या अन्य परिजनों के हाथों में है। डीपीआरओ कार्यालय से मिली ग्राम प्रधानों की सूची से पड़ताल के लिए करीब 40 ग्राम प्रधानों को फोन किया गया। इस दौरान सभी के नंबर उनके पति, बेटे या परिवार के किसी अन्य सदस्य ने उठाए। सभी प्रधानों के परिजनों ने ही खुद को प्रधान बताया।
ग्राम विकास के संबंध में होने वाली तमाम योजनाओं की जरूरी बैठकों में भी अधिकतर महिला प्रधान नहीं पहुंचती हैं। उनके प्रतिनिधि ही बैठकों में पहुंचते हैं। सिर्फ कागज में हस्ताक्षर महिला प्रधानों से करा लिया जाता है। कुछ पंचायतों में तो यह कार्य भी उनके प्रतिनिधि ही करते हैं। एक प्रधान के प्रतिनिधि ने बताया कि जब किसी बड़े अफसर या जन प्रतिनिधि का आना होता है तब प्रधान को बुलाया जाता है। हालांकि बैठकों में तब भी वह कोई राय नहीं नहीं देती हैं। कारण यह है कि उन्हें जानकारी ही नहीं होती है।
दुबौलिया ब्लॉक के ग्राम पंचायत छपिया की प्रधान आरती देवी का फोन उनके भाई धर्मेंद्र ने उठाया। प्रधान से बात कराने का अनुरोध करने पर कहा कि वही प्रधान हैं। उनसे कहा गया कि गोशाला में गोवंश को ठंड से बचाव के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं इसकी जानकारी चाहिए। धर्मेंद्र ने कहा कि जो भी बात करनी है मुझसे करिए।
बनकटी ब्लॉक की ग्राम पंचायत बरहुआ की प्रधान कमलावती को फोन किया गया तो फोन उनके बेटे पप्पू ने उठाया। प्रधान से बात कराने का अनुरोध करने पर कहा कि वह प्रधान ही बात कर रहे हैं।
बहादुरपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत शेखपुरा प्रधान शांति को फोन किया गया। उनके पुत्र अमरनाथ ने फोन उठाया। प्रधान से बात कराने का अनुरोध किया गया तो उन्होंने कहा कि पंचायत का सारा कामकाज मेरे द्वारा ही संपादित किया जाता है। माता जी सिर्फ फाइलों पर हस्ताक्षर करती हैं।
प्रतिनिधि की वजह से जेल तक जा चुकी हैं महिला प्रधान
ग्राम पंचायत पोखरभिटवा की पूर्व प्रधान विजय लक्ष्मी चौधरी 10 लाख गबन के आरोप में 20 अक्तूबर 2023 को जेल जा चुकी हैं। इनकी प्रधानी परिजन चला रहे थे।
ग्राम पंचायत महेवा कुंवर की प्रधान फूला देवी मिड डे मील अनाज गबन के आरोप में 30 अक्तूबर 2023 को जेल जा चुकी हैं। उनकी प्रधानी का कामकाज पति राजेश कुमार सिंह देखते थे।
ऐसे मामलों में कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। क्योंकि कागज पर हस्ताक्षर महिला प्रधान के ही होते हैं। उन्होंने दावा किया कि वह अपने स्तर से खुद ऐसा नहीं होने देते हैं। सभी बैठकों में महिला प्रधान शामिल होती हैं। यदि ऐसा है तो सचिवों से रिपोर्ट लेंगे।
-रतन कुमार, डीपीआरओ