बस्ती। जमीन का बैनामा कराने में भी बड़ा खेल है। भू-माफिया के घनचक्कर में पड़े तो बुरे फंस सकते हैं। फर्जी नाम और आईडी के जरिए बेरोकटोक रजिस्ट्री हो रही है। इसका पता तब चलेगा जब आप कब्जा दखल के लिए संबंधित भू-खंड की ओर रुख करेंगे। सच्चाई से अवगत होते ही आपके होश उड़ जाएंगे और आप ठगा महसूस करेंगे। हां, यह सच है। सरकारी दस्तावेज में इस तरह का फर्जीवाड़ा अक्सर दर्ज हो रहा है। विभाग इस खेल से अपने को बिल्कुल अलग मानता है। महज स्टाम्प और पंजीयन शुल्क की वसूली ही निबंधन का नियम है। जमीन खरीदफरोख्त में फर्जीवाड़ा हुआ तो क्रेता-विक्रेता ही जिम्मेदार हैं। इसलिए जमीन का बैनामा कराने से पहले हर पहलू पर तफ्तीश जरुरी है वरना डूब जाएगी आपके जीवन की गाढ़ी कमाई।
भू-माफिया का काॅकस तो अब गांव से शहर तक है। जमीन की कीमतों में भारी उछाल इन्हीं की वजह से हैं। महंगी दर पर ही सही क्रेताओं को सही-सलामत जमीन मिल जाए तब भी गनीमत। अक्सर पाई-पाई सहेजकर जमीन खरीदने की हसरत आंसुओं में तब्दील हो जाती है। विवादित भू-खंड पर भी ग्राहकों से भारी-भरकम रकम वसूलकर उन्हें बेच दिया जा रहा है। बाद उन्हें मुकदमे में उलझकर रह जाना पड़ रहा है। टीम की पड़ताल में ऐसे कई मामले उजागर हुए हैं।
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बैनामा कराने में सुविधा शुल्क अनिवार्य
बैनामा कराने में सुविधा शुल्क देना अनिवार्य है। विभागीय जिम्मेदार क्रेताओं से यह रकम बिना शोरगुल के वसूल लेते हैं। इस अवैध कमाई के माध्यम कोई और नहीं दस्तावेज लेखक ही हैं। मालियत का एक फीसदी पंजीयन शुल्क और साथ में एक फीसदी सुविधा शुल्क भी दिया जाना सभी के लिए अनिवार्य है। इसके अलावा आनलाइन रजिस्ट्री करने वाले कर्मचारियों को बख्शीस अलग से दिया जाता है। इस परंपरा का पालन न करने पर नियमों की दुहाई देकर बैनामा लंबित कर दिया जाता है। इसलिए लेखक भी इस परंपरा के पालन को मजबूर हैं। इस तरह प्रतिदिन जमा होने वाले पंजीयन शुल्क के बराबर की काली कमाई भी है। इस खेल में जिम्मेदार अफसरों की मौन सहमति रहती है।
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बैनामा में मिला धोखा, अब लड़ रहे मुकदमा
केस नंबर- एक
कोतवाली थाना क्षेत्र के लोहटी गांव निवासी मो. जमाल भू-माफिया के जाल में बुरी तरह फंस गए। उन्हें बस्ती-मुंडेरवा मार्ग के किनारे स्थित मौजा कड़र में चहारदीवारी युक्त छह बिस्वा जमीन खरीदने के लिए प्रेरित किया गया। कीमत तय हुई 27 लाख रुपये। खतौनी जांच में भी कोई विवाद सामने नहीं आया। संबंधित जमीन खरीदने के लिए मो. जमाल तैयार हो गए। 26 अप्रैल 2019 को उन्होंने अपनी पत्नी मैनुन्निशा के नाम बैनामा भी करा दिया। लगभग दो महीने के बाद उन्हें पता चला कूटरचित आधार कार्ड और वोटर आईडी के जरिए एक महिला ने उक्त जमीन का फर्जी बैनामा कर दिया। जमीन की वास्तविक मालकिन सावित्री शुक्ला कोई और निकलीं। मो. जमाल और उनका परिवार काफी दिनों तक अवसाद में था। मामले में तीन साजिशकर्ताओं के खिलाफ पुरानी बस्ती थाने मुकदमा दर्ज हुआ और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उनके धन की रिकवरी अभी तक नहीं हो पाई है।
केस नंबर- दो
31 जनवरी 2023 को सदर तहसील के डिड़ौहा गांव गाटा संख्या 169 में अपने हिस्से के बैनामे के दौरान विक्रेता दिलीप कुमार ठगे गए। इन्हें यूनियन बैंक आफ इंडिया के दो चेक नंबर 014980 एवं 014929 तीन लाख रुपये के प्राप्त हुए। स्टांप में उक्त चेक नंबर अंकित कर बैनामा हुआ। बाद में ये दोनों चेक क्लीयर नहीं हुए। बकौल दिलीप कुमार, उन्हें उनकी जमीन की कीमत अब तक नहीं मिली है। अब वह बाउंस चेक को आधार बनाकर न्यायालय की शरण में हैं।
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स्टांप में भी होती है चोरी
विभाग की मिली भगत से स्टाम्प में भी चोरी की जाती है। जानकार बताते हैं कि छोटे नंबरों की रजिस्ट्री सामूहिक रूप से कृषि भूमि में कराकर स्टांप की चोरी कर ली जाती है। इसके एवज में विभाग को सुविधा शुल्क देना पड़ता है। इसके अलावा रास्ते से जुड़ी भूमि की रजिस्ट्री में भी स्टाम्प शुल्क की चोरी की जाती है। विभाग कुछेक मामलों की ही जांच कर खानापूरी कर लेता है।
औसतन प्रतिदिन हो रहे 30 से 35 बैनामे
उप निबंधन कार्यालय बस्ती सदर में प्रतिदिन 30 से 35 की संख्या में बैनामे हो रहे हैं। यह औसत अप्रैल का है। इस महीने कुल 7.32 करोड़ रुपये पंजीयन शुल्क के रूप में राजस्व की वसूली हुई है।
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बैनामा कराने में ये बरतें सावधानी
- भूमि से संबंधित खतौनी और नक्शे का मुआयना
- जमीन बंधक न हो इसके लिए 12 साल के रिकार्ड की छानबीन
- कृषि युक्त भूमि का चकबंदी कार्यालय में मुआयना
- स्टांप में जमीन की चौहद्दी का सटीक वर्णन
बैनामा कराने में ये हैं निर्धारित शुल्क
शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों का मालियत शासन से निर्धारित है। बैनामा कराने के लिए शहरी एवं अर्धशहरी क्षेत्र में पुरुष के लिए स्टांप शुल्क मालियत का सात प्रतिशत और महिला के लिए छह प्रतिशत निर्धारित है। यदि दस लाख से अधिक की मालियत है तो बैनामे में महिला को दस हजार रुपये की छूट अनुमन्य है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में पुरुष वर्ग के लिए मालियत का पांच प्रतिशत और महिला के लिए चार प्रतिशत स्टांप शुल्क निर्धारित है। इसके अलावा मालियत का एक प्रतिशत धन पंजीयन शुल्क के रूप में जमा करना होता है। यह शुल्क रकबा के हिसाब से तय होता है। इसके अतिरिक्त रजिस्ट्री में कोई अन्य खर्च विधिक रूप से नहीं है।
जमीन बैनामा कराने से पहले खतौनी, 12 साल का रिकार्ड, चकबंदी कार्यालय में मुआयना बहुत ही अनिवार्य हैं। इसके अलावा बैनामा से पहले क्रेता को जमीन की मार्किंग विक्रेता और लेखपाल की मौजूदगी में करा लेनी चाहिए। अच्छे से विक्रेता की तस्दीक कर लेनी चाहिए। बैनामा कराते समय सही चौहद्दी, सड़क, चकमार्ग आदि जो भी हो स्पष्ट दर्शाना चाहिए। इन मुख्य सावधानियों को यदि बरता जाए तो फर्जीबाड़ा की गुंजाइश कम रहती है। किसी के मौखिक दावे पर जमीन की खरीद-फरोख्त कतई नहीं करनी चाहिए। -धर्मेंद्र नारायण त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता
बैनामा में सुविधा शुल्क लिए जाने का कोई भी मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि कोई स्टांप चोरी करता है तो विभागीय जांच में पकड़ा जाता है। हमारे ऊपर के अफसर भी भू-खंडों की रजिस्ट्री पर निगाह रखते हैं। जहां तक फर्जी रजिस्ट्री की बात है तो इसके लिए क्रेता व विक्रेता सीधे जिम्मेदार हैं। विभाग की नियमावली में सिर्फ शुल्क जमा कराकर बैनामा कराना है। बाकी जमीन किस प्रकृति की है। इसकी छानबीन क्रेता को ही करनी चाहिए। -ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, उप निबंधक बस्ती सदर