बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार सप्तम की अदालत ने पत्नी की हत्या के मामले में दोषसिद्ध पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाते हुए कहा कि इसे न अदा करने पर छह माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी।
मामला, परशुरामपुर थाना क्षेत्र के नंदनगर चौरी गांव का है। जिला फौजदारी शासकीय अधिवक्ता परपूर्णानंद पांडेय के नेतृत्व में एडीजीसी राघवेश प्रसाद पांडेय ने अदालत के समक्ष घटना का विवरण रखा। उन्होंने बताया कि परशुरामपुर थानाक्षेत्र के नरायनपुर पांडेय गांव निवासी सुधरा पत्नी लल्ला ने 27 नवंबर 2017 को थाने में तहरीर देकर बताया कि उन्होंने अपनी बेटी सुनीता की शादी नंदनगर चौरी के सोमनाथ पुत्र जगलाल के साथ की थी। उनकी बेटी को दो बच्चे हैं। 23 नवंबर 2017 को उसके पति सोमनाथ और जगलाल ने मिलकर बेटी को मिलकर जला दिया। जिला अस्पताल फैजाबाद में इलाज के दौरान 25 नवंबर को उसकी मौत हो गई। सहायक अभियाेजक ने बताया कि मौत से पहले मजिस्ट्रेट ने सुनीता का मृतकालिक बयान दर्ज किया था। विवेचना के दौरान साक्ष्य के अभाव में विवेचक ने जगलाल का नाम विलोपित कर दिया। अभियोजन ने अदालत के समक्ष मृतक सुनीता का मृतकालिक बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और नौ गवाह प्रस्तुत किए। न्यायाधीश ने सोमनाथ को दोषसिद्ध पाया। अदालत उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।