बस्ती। शहर से सटे संत कुटीर आश्रम में यौन शोषण का मामला दिसंबर 2017 में तब प्रकाश में आया था, जब आश्रम से कुछ युवतियों को धक्के मारकर निकाल दिया गया। ये डरी-सहमी हुई रात में ही एसपी दफ्तर पहुंची थीं। वहां तत्कालीन कोतवाल विजयेंद्र सिंह महिला पुलिस के साथ पहुंचे और पीड़ितों को बयान के लिए कोतवाली ले गए। तत्कालीन एसपी संकल्प शर्मा के निर्देश पर देर रात कथित बाबा के अलावा उनके तीन शिष्यों व दो मुख्य सेविकाओं पर 2008 से लगातार यौन शोषण व सामूहिक दुष्कर्म करते रहने का केस दर्ज किया गया।
पीड़ित महिलाओं का आरोप था कि सत्संग व प्रवचन के नाम पर महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों को आश्रम में बुलाया जाता था। उनमें से कुछ लड़कियों को साध्वी का दर्जा देकर आश्रम में रख लिया जाता था। उन्हें अनुष्ठान के जरिए विशेष कृपा दिलाने का दिलासा देते थे। उनका विश्वास जीतने के बाद दिल्ली स्थित आश्रम के मुख्यालय अथवा यहां के कथित बाबा व चेलों के निर्देश पर अलग-अलग शहरों में प्रवचन-सत्संग के बहाने भेजकर उनका यौन शोषण किया जाता था।
केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह दबिश दी, लेकिन बाबा नहीं मिला। आश्रम की कुर्की तक हुई और 50 हजार का इनाम घोषित किया गया। फिर भी वह हाथ नहीं आया। अलबत्ता उसका एक शिष्य और एक सेविका को पांच अगस्त 2018 में बभनान रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया गया। एक जुलाई 2021 को तत्कालीन एसपी एसटीएफ हेमराज मीणा के निर्देशन में आरोपी बाबा को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया गया था।
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नाम बदलने में माहिर है बाबा
पुलिस की जांच में पाया गया कि बाबा नाम बदलने में भी माहिर है। कोतवाली थाने में उसके विरुद्ध किशोरियों से दुष्कर्म, अपहरण, छेड़खानी, साजिश, न्यायालय के आदेश की अवहेलना के केस दर्ज हैं। इसके अलावा लालगंज थाने के सेल्हरा गांव निवासी शिष्य श्यामचंद उर्फ तपस्यानंद के अपहरण का केस भी दर्ज है।