छावनी। माझिलगांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक मयंक कृष्ण महराज ने कहा कि धरा पर भगवान का अवतार तभी होता है जब धर्म की हानि होनी शुरू हो जाती है। ब्राह्मण, गो, स्त्री, संत, भक्त, वेद, पुराण, शास्त्र स्मृती, गीता व रामायण जैसे ग्रंथों का अपमान होता है। तभी भगवान का अवतार होता है। धरती पर धर्म की स्थापना का कार्य ईश्वर का है। मनुष्य का दायित्व है कि वह धर्म को माने और उसके नियमों का पालन करे। भगवान भक्तों की खातिर कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। आजकल समाज में कदाचार बढ़ रहा है। मौके पर आचार्य अनिल मिश्र, रत्नेश मिश्रा, रजनीश दुबे, रविंद्र नाथ दुबे, केश कुमारी दुबे, विंध्याचल दुबे, राम यज्ञ दुबे, कपिल देव दुबे आदि मौजूद रहे। संवाद