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Basti News: लाल निशान लांघकर 18 सेंटीमीटर ऊपर पहुंची सरयू की धारा, माझा में तबाही

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मैरूंड गांव सुबिका बाबू के नागरिकों का हाल जानकर मोटर बोट से वापस लौटते एसडीएम हर्रैया साथ थाना
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बस्ती। तीन दिनों से सरयू लगातार उफान मार रही है। चौबीस घंटे में नदी ने दोगुना बढ़त ली है। एक दिन पहले जलस्तर लाल निशान से सात सेंटीमीटर ऊपर दर्ज हुआ, तो दूसरे दिन बृहस्पतिवार की शाम चार बजे तक सरयू 18 सेंटीमीटर ऊपर उठकर बहने लगी। जलस्तर में बढ़त लगातार दर्ज की जा रही है। विकराल स्वरूप की ओर बढ़ रही नदी को देख तटवर्ती गांवों के नागरिक सहम गए है। अभी तक एक दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की जद में आ चुके हैं। दुबौलिया ब्लॉक का सुविका बाबू गांव मैरूंड हो चुका है, तो विक्र्रमजोत ब्लॉक के आधा दर्जन गांव मैरूंड होने की कगार पर पहुंच गए हैं। माझा में तबाही का दौर शुरू हो चुका है।
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संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासनिक हलचल भी तेज हो गई है। दो दिनों से आला अधिकारी बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंच रहे हैं। एसडीएम हर्रैया राजस्व एवं अन्य विभागों के कर्मचारियों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में चौबीस घंटे कैंप कर रहे हैं। पल-पल की सूचना उच्चाधिकारियों को अपडेट की जाने लगी है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। वहीं माझा क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के समीप नदी पहुंच चुकी है। कई गांव चौतरफा पानी से घिरने लगे हैं। जिनका संपर्क मुख्य मार्गों से लगभग टूट चुका है। ग्रामीणों की जिंदगी नाव के सहारे हो गई है।

मैरूंड सुविका बाबू गांव के नागरिकों को गृहस्थी उजड़ने का डर
दुबौलिया। कटरिया- चांदपुर तटबंध और नदी के बीच बसा सुविका बाबू गांव मैरूंंड हो गया है। मुख्य मार्ग से संपर्क टूट चुका है। यहां रहने वाले 40 परिवारों के 300 नागरिकों की जिंदगी पर बाढ़ की विभीषिका कहर बरपाना शुरू कर दी है। टापू बन चुके इस गांव की महिलाएं, बच्चे, पुरुष हर किसी का जीवन नाव पर निर्भर हो गया है। फूस के कुछ घरों में पानी घुस गया है। नागरिक अगल-बगल के घरों में शरण लिए हैं। समूचे गांव के लोगों को हर वर्ष की भांति इस बार भी गृहस्थी उजड़ने का डर सता रहा है। इन लोगों को टापू से निकालकर अन्यत्र विस्थापित किए जाने की प्रशासनिक कवायद चल रही है, लेकिन आशियाने और गृहस्थी की मोह इन्हें अभी रोके हुए है। सब्जी, राशन, तेल, मसाला आदि रोजमर्रा की वस्तुओं को जुटाने के लिए लोगों को नाव से कटरिया तटबंध तक आना पड़ रहा है। इतनी समस्या से जूझते हुए भी नागरिक गांव में रहने के लिए फिलहाल तैयार हैं, यदि इसके बाद सरयू ने और विस्तार लिया तो घर-गृहस्थी छोड़ गांव से पलायन करना इनकी मजबूरी बन जाएगी।
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बाढ़ की डर से तटबंध पर बना रहे ठिकाना
दुबौलिया क्षेत्र के विशुनदासपुर की अनुसूचित बस्ती भी चौतरफा पानी से घिर गई है। केवल रास्ता ही बचा है। यहां ग्रामीण सजग हो गए हैं। लोगों ने तटबंध पर आकर पन्नी एवं फूस के सहारे अस्थायी ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा टेढ़वा, भुवरिया, अशोकपुर ग्राम पंचायत के कई पुरवे, बरदिया लोहार ग्राम पंचायत के सरवरपुर, बानेपुर, पूरेमोतीराम, देवारागंगबरार की नदी उस पार स्थित बस्ती, कुर्मियाना, रंजीत नगर, टकटकवा, मोजपुर व मोजपुर रिंगबाध की तरफ बसे आधा दर्जन गांवों की तरफ पानी तेजी से फैल रहा है। जलस्तर बढ़ा तो एक दो दिन में इन गांवों में भी तबाही मच जाएगी।

तटबंधों पर बढ़ा दबाव
नदी का दबाव कटरिया- चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर गांव से लेकर खलवा गांव तक बढ़ गया है। यहां ठोकर नंबर-एक भी भारी दबाव है। बैकरोल के चलते हल्की कटान भी हो रही है। बाढ़ खंड लगातार निगरानी में जुटा है। गौरा-सैफाबाद तटबंध पर टकटकवा गांव से लेकर दलपतपुर गांव तक पानी का दबाव है।

बोले नागरिक- तबाही में जीने की आदत
बाढ़ पीड़ितों का दर्द फिर छलक रहा है। चौतरफा पानी से घिरे गांवों के नागरिक कुरेदने पर सिर्फ यहीं कह रहे हैं कि तबाही में जीने की उनकी आदत सी बन गई है। अंतिम क्षण तक घर गृहस्थी संभालने की कोशिश बाद में पलायन के सिवाय और कोई विकल्प उनके सामने नहीं रहता है।
पानी से गांव को घिरे हुए आज तीसरा दिन है। हम लोगों के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी खतरा मोल ले रहे हैं। उन्हें एक किलोमीटर तक नाव पर बैठकर स्कूल जाना पड़ रहा है।
-रामनाथ, सुविका बाबू।

बाढ़ के समय भगवान से बस यही विनती रहती है कि घर में किसी की तबीयत न खराब हो। वरना टापू से निकलकर अस्पताल कैसे जाएंगे। साहब दवाई, पढ़ाई हर चीज की दिक्कत रहती है।
-राम औतार, सुविका बाबू।
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अभी धान की रोपाई हुए दस दिन नहीं हुआ, फसल बाढ़ के पानी से डूब गई। हर बार हम लोग खेती भर्ती लगाकर धोखा खा जाते हैं। खेतों में कमर भर पानी लग गया है। फसल खराब होना तय है।
-राम स्वारथ, सुविका बाबू।
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पूरा गांव पानी से घिर गया है। केवल रास्ता बचा है, शाम तक वह भी पानी में डूब जाएगा। मवेशियों के लिए चारे का संकट हो गया है। समय रहते तटबंध पर अस्थायी ठिकाना बनना पड़ रहा है।
-राम विलास, अनुसूचित बस्ती, विशुनदास पुर।
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विक्रमजोत के इन गांवों में बढ़ा खतरा
विक्रमजोत। क्षेत्र के तटबंध विहीन गांवों में सरयू कहर बरपाने को आतुर है। यदि जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो एक से दो दिन बाद कई गांव मैरुंड हो जाएंगे। क्षेत्र के कल्यानपुर, भरथापुर, सहजौरा समेत तटबंध विहीन दर्जन भर गांव के सिवान में नदी का पानी भरने लगा है। कल्यानपुर, भरथापुर को फूलडीह गांव से जोड़ने वाले मार्ग पर नदी का पानी बह रहा है, जिससे आवागमन में कठिनाई हो रही है। बाढ़ खंड व अन्य प्रशासनिक अमला यहां अभी नहीं पहुंचा है। इन गांवों में कटान की भी आशंका है।

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सरयू का जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार बृहस्पतिवार को शाम चार बजे नदी का जलस्तर खतरे के निशान 92.73 मीटर से 18 सेमी ऊपर 92.91 मीटर पर रिकार्ड किया गया है। इस दिन नदी में विभिन्न बैराजों से 330619 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गिरिजा बैराज से 172973, शारदा बैराज से 149878 और सरयू बैराज से 7768 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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