बस्ती। 1990 की कारसेवा और 1992 में विवादित ढांचा के विध्वंस के दौरान बड़ी संख्या में राम भक्त सड़क मार्ग से न होकर घाटों से सरयू पार करके अयोध्या पहुंचे थे। इसके लिए जिले के घाटों से नाव के सहारे रामभक्तों ने नदी पार किया था। 22 जनवरी को भी कोई जत्था उन रास्तों को पकड़कर न जाने लगे, इसे रोकने के लिए माकूल प्रबंध किए जा रहे हैं। कलवारी से लेकर विक्रमजोत के बीच ऐसे दो दर्जन स्थान/घाट हैं जहां से लोग नाव से अयोध्या की तरफ जाते हैं। कई लोगों की वहां खेती-बाड़ी है। इसके लिए पुलिस पहले से तैयारी कर रही है।
इस रणनीतिक कदम का उद्देश्य प्रमुख क्षेत्रों में समग्र निगरानी और सुरक्षा को बढ़ाना है। आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अयोध्या की तरफ से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमों को तैनात किया गया है। एसडीआरएफ टीमें नियमित बोट पेट्रोलिंग करेंगी।
डायवर्जन को लेकर जारी है मंथन
फोरलेन से होकर अयोध्या की तरफ जाने वालों को रोकने, वाहनों का मार्ग डायवर्ट करने की रणनीति पर मंथन चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि 19 जनवरी से पूरी तरह से डायवर्जन लागू किया जाएगा। मगर, इसके पहले भी आवश्यकता पड़ी तो भारी वाहनों का रूट डायवर्ट किया जा सकता है। इसके लिए अयोध्या पुलिस प्रशासन से लगातार समन्वय बनाया गया है।
बरात व शव वाहनों को लेकर बनेगी रणनीति
16 जनवरी से सहालग भी शुरू हो रहा है। 16, 17, 20, 21, 22 जनवरी को लग्न है। ऐसे में तमाम बरात बस्ती की तरफ से अयोध्या और अयोध्या की तरफ से इधर आनी हैं। डायवर्जन लागू होने के बाद शादी में आने वाले वाहनों को किस तरह आने दिया जाएगा, इसके लिए पुलिस प्रशासन योजना बना रहा है। साथ ही, शव वाहनों के साथ कितने लोगों को अयोध्या जाने की छूट दी जाएगी, इस पर भी अंतिम फैसला होना बाकी है। एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी ने बताया कि इस बारे में शीघ्र निर्णय ले लिया जाएगा।