सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में चित्रकला कार्यशाला में अभ्यास करती छात्रा।
बस्ती।‘दृश्यकलाएं’ हमारी ‘दृष्टि’ से सीधे तौर पर जुड़ी हैं। ऐसे में यह सीखने की परिस्थिति के प्रत्येक स्तर को सजीव बनाती हैं। समय परिस्थिति के अनुसार विचार और भावनाओं को मूर्त रूप में देख कर बालक उनको अधिक समय तक मस्तिष्क में रख सकता है। वह अपने स्मरण शक्ति के आधार पर चित्र सृजन भी कर सकता है। सीखने की प्रक्रिया में यह अत्यंत आवश्यक पहलू है।
यह कहना है चित्रकला कार्यशाला संयोजक डॉ. रमा शर्मा का। वह रविवार को राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश (संस्कृति विभाग) की ओर से सरस्वती बालिका विद्या मंदिर रामबाग़ में संचालित ग्रीष्मकालीन चित्रकला कार्यशाला में बोल रही थीं। कहा कि कलाकृति के रूप में रंग व रेखाओं के माध्यम से अपनी अनुभूतियों को प्रस्तुत करना ही चित्रकला है। किसी भी चित्र को कलाकार ह्रदय की भावनाओं को रेखाओं के माध्यम से अंकित कर रंगों से सुंदर रूप प्रदान करता है। चित्रकला न सिर्फ़ एक विषय है बल्कि यह आत्माभिव्यक्ति एवं काल्पनिक मनोभावों को उकेरने का साधन भी है।
कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में रजनी चौधरी ने क्राफ़्ट संबंधी जानकारी दी। व्यर्थ के सामानों से काम में लाई जाने योग्य है सजावटी वस्तुओं को बनाने के टिप्स भी दिए। छात्र-छात्राओं ने दी गई जानकारी का अनुसरण करते हुए कलात्मक प्रयोग भी किए।