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Basti News: सरयू का वेग रोकने के लिए परकोपाइन का इस्तेमाल

Tue, 25 Jun 2024 02:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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नदियों का रुख मोड़ने में पहले भी होता आया है इस तकनीक का इस्तेमाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती/दुबौलिया। बाढ़ से पहले संवेदनशील स्थानों पर कटान रोकने की तैयारियां चल रही हैं। गौरा-सैफाबाद तटबंध पर पारा गांव में 250 मीटर की लंबाई में बाढ़ खंड परकोपाइन बना रहा है। यह कटान रोकने की कारगर तकनीक मानी जाती है। इस तकनीक का उपयोग नदियों के रुख को मोड़ने के लिए किया जाता है। इससे पानी का अधिक दबाव तटबंध पर नहीं पड़ता है और वह सुरक्षित रहता है।
जानकारी के अनुसार, गौरा-सैफाबाद तटबंध पर बाढ़ से बचाव के लिए तेजी से काम चल रहा है। तटबंध के किनारे स्पर व बोल्डर पिचिंग का काम लगभग पूरा हो चुका है। डेंजर प्वाइंट की ड्रोन कैमरे से तस्वीरें ली जा रही है, ताकि समय रहते हर संभव जतन कर लिया जाएगा। तटबंध पर परकोपाइन बनाने का काम शुरू हो गया है।
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बाढ़ खंड के अनुसार, नदी का जलस्तर बढ़ने पर तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ जाता है। जबकि घटने पर कटान होने लगती है। अनुरक्षण मद से 250 मीटर क्षेत्र में परकोपाइन बनाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि गौरा-सैफाबाद तटबंध पर चल रहीं परियोजनाएं पूरी कर ली गई हैं। तटबंध पर सुरक्षा के लिए दो डैंपनर व रिवेटमेंट का काम पूरा कर लिया गया है। एक स्पर के पुनर्स्थापना का काम चल रहा है।
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ये हैं परकोपाइन तकनीक
परकोपाइन तकनीक में 3.5 मीटर लंबाई के छह खंभे बनाए जाते हैं, जो देखने में रेलवे ट्रैक के स्लीपर जैसे होते हैं। पोल में खास तरह के हुक बनाए जाते हैं। तीन खंभे को समकोण की तरह जोड़कर बेस बनाया जाता है। फिर उनके तीनों कोने पर तीन खंभे खड़े किए जाते हैं। इन तीनों खंभें पिरामिड की तरह जोड़ दिए जाते हैं। इस तरह से कई पिरामिड बनाए जाते हैं। नदी के उस किनारे से पिरामिड को जोड़ा जाता है, जिससे उसकी दिशा बदलनी होती है। पिरामिड को आपस में ज्वाइंट करते हुए नदी की ओर ले जाया जाता है। इन पिरामिड पर नदी के बहाव का असर नहीं पड़ता है। धीरे-धीरे इसमें घास, झाड़ियां और रेत आदि अटकना शुरू हो जाता है, जो एक प्राकृतिक तटबंध का रूप ले लेता है और तटबंध पर कटान नहीं हो पाती है।
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