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Basti News: नहीं मिल पा रही जमीन... एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बाद उद्यमी निराश

Sun, 03 Mar 2024 12:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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उद्योगों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करा पा रहा विभाग, अधर में प्रोजेक्ट
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महायोजना में शामिल हुई थी इंडस्टि्रयल कॉरिडोर एवं एजुकेशन हब बनाने की योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यूपी ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के तहत उद्योगों से गुलजार करने की योजना जिले में अधर में लटकती दिख रही है। एमओयू पर हस्ताक्षर करने वाले 286 में से 112 उद्योग की ही तैयारी पूरी होती दिख रही है। 174 उद्योग धरातल से कोसो दूर हैं। इसमें दो दर्जन से अधिक ऐसे उद्योग हैं जो जमीन के अभाव में स्थापित नहीं हो पा रहे हैं। प्रशासन और विभाग जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करा पा रहा है।
ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में जिले में 14232. 85 करोड़ रुपये से उद्योगों की स्थापना का करार हुआ था। मगर, इसमें तेजी नहीं आ सकी। अब तक 15,462 रुपये की लागत के ही उद्योगों की स्थापना की कवायद शुरू हो पाई है। इसमें ज्यादातर 100 से 200 करोड़ के उद्योग हैं। 300 करोड़ से अधिकतम किसी भी उद्योग के स्थापना की पहल नहीं हो सकी है। अधिकतर उद्यमियों के लिए यह जनपद मुफीद नहीं साबित हो पा रहा है। उन्हें प्रथम चरण में झटका लग रहा है।
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उद्योगों की स्थापना के लिए जमीन की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। बड़े उद्योग के लिए कुछ उद्यमियों ने शुरुआती दौर में व्यक्तिगत प्रयास से हाईवे एवं अन्य राजमार्गों के किनारे जमीन की खरीदारी कर ली थी। इन जगहों पर कल-कारखानों की स्थापना शुरू हो गई है। इसके बाद 50 से 100 एकड़ जमीन की आवश्यकता वाले उद्यमियों को जमीन नहीं मिल पा रही है।
एमओयू पर हस्ताक्षर करने वाले बड़े उद्यमियों ने उद्योग बंधु समिति की बैठक के दौरान प्रशासन के समक्ष कई बार यह समस्या उठाई। उद्यमियों की तरफ से यह भी पहल की गई कि प्रशासन खुद उद्योग के लिए उपयुक्त जगह चिह्नित कर जमीन का अधिग्रहण कराए। इसके जरिए उद्यमियों को जमीन मिलने में आसानी होगी। मगर, प्रशासन रुचि नहीं ले रहा है।
बस्ती विकास प्राधिकरण के महायोजना 2031 में उद्यमियों की पहल पर इंडस्टि्रयल कॉरिडोर एवं एजुकेशन हब बनाने का प्रस्ताव शामिल किया गया था। मगर, महायोजना को स्वीकृति न मिलने से यह प्रस्ताव प्रभावी नहीं हो पाया। उद्यमियों का सुझाव था कि शहर के चारों तरफ प्रस्तावित रिंग रोड के आसपास या फिर हाईवे के किनारे उद्योगों के लिए जगह चिह्नित की जाए। आवश्यकतानुसार काश्तकारों से जमीन का अधिग्रहण कराया जाए। अधिग्रहण खर्च उद्यमी वहन करेंगे। मगर, यह योजना फ्लाप साबित होती दिख रही है। बीडीए एवं प्रशासन की तरफ से ऐसी कोई भी जगह चिह्नित नहीं की जा सकी है।
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महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट निरस्त होने के कगार पर
एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद उम्मीद बढ़ी कि मुंबई, गुजरात, यूके की तरह इस्पात, आयरन, स्टील, पेट्रोलियम, फूड प्रोसेसिंग आदि से जुड़ी निर्माण कंपनियां बड़े पैमाने पर यहां उतरेंगी। मगर, इसके लिए स्थानीय स्तर पर औद्योगिक नगरी के रूप में किसी क्षेत्र को चिह्नित नहीं किया जा सका। इससे महानगरों की भांति नियोजित उद्योग क्षेत्र विकसित नहीं हो पा रहा है। उपयुक्त जगह न मिल पाने के कारण अनुमानित 1500 से 2000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट यहां नहीं स्थापित हो पा रहे हैं। 15 से 20 बड़े उद्यमी अब यहां उद्योग लगाने से हाथ खींचने लगे हैं।
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विश्वविद्यालय की होनी थी स्थापना, नहीं मिल रही जमीन
ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के दौरान बस्ती में निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पहल हुई थी। इसके लिए एक उद्यमी से करार भी हुआ। इस यूनिट की स्थापना में 50 एकड़ तक जमीन की आवश्यकता है। मगर, जमीन की नहीं मिल पा रही है। प्रशासन ने भी जमीन उपलब्ध कराने से हाथ खड़े कर लिए। इससे यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अधर में लटक गया इसके अलावा एईएस फर्म को दस एकड़ जमीन की दरकार थी। मगर, यह उपलब्ध नहीं हो पाई। कुछ दिनों तक उम्मीद थी कि प्रशासन उद्योगों की स्थापना के लिए अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी कराएगा। जब बात नहीं बनी तो एईस को अपनी इकाई स्थापित करने से पीछे हटना पड़ा।
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बिना अधिग्रहण के नहीं मिलेगा जमीन
चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन अशोक सिंह ने कहा कि बड़े उद्योगों की स्थापना बिना अधिग्रहण प्रक्रिया के संभव नहीं है। 50 से 100 एकड़ जमीन एक मुश्त उद्यमियों को सीधे काश्तकारों से उपलब्ध नहीं हो सकती है। इसमें तमाम तरह की अड़चन है। इसीलिए अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव लाया गया था। मगर, प्रशासन इसके लिए तैयार नहीं हुआ। यदि प्रशासन इस मामले में मदद करें तो उद्योगों की संख्या बढ़ जाएगी।
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कोट
उद्यमियों के लिए जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रिजेक्ट नहीं हुआ है। रिंग रोड बनने के बाद यह तय किया जाना है कि उसके आसपास इंडस्टि्रयल कॉरिडोर के लिए कौन सी जगह उपयुक्त होगी। भविष्य में इस प्रस्ताव पर कार्य किया जाएगा।
-हरेंद्र कुमार, उपायुक्त उद्योग
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